पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारतीय सेना की संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए अब एक नया और खतरनाक पैंतरा आजमाया है। आईएसआई की नजर अब भारत के पूर्व सैनिकों पर है।
खाड़ी देशों में सिक्योरिटी गार्ड की ऊंची सैलरी वाली नौकरी का लालच देकर पूर्व सैनिकों को वहां बुलाया जा रहा है और फिर उन्हें जासूसी के दलदल में धकेला जा रहा है। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, आईएसआई ने खाड़ी देशों..सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, कतर और यूएई में अपना एक बड़ा जाल फैला रखा है। भारत के विभिन्न राज्यों में सक्रिय एजेंटों के जरिए ऐसे पूर्व सैनिकों की पहचान की जाती है जिनकी उम्र 50 वर्ष के आसपास है या जो 15 साल की सेवा के बाद रिटायर हुए हैं। इन्हें बेहतर सैलरी, मेडिकल पैकेज और शानदार रहन-सहन का झांसा देकर विदेश भेजा जाता है।
1,000 पूर्व सैनिक निशाने पर
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में केरल की एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से लगभग एक हजार पूर्व सैनिकों को खाड़ी देशों में भेजा गया है। इस एजेंसी के तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की आशंका है।
भारतीय सेना ने किया अलर्ट
आईएसआई के इन नापाक इरादों को देखते हुए भारतीय सेना ने अपने पूर्व सैनिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्हें सतर्क रहने और संदिग्ध प्लेसमेंट एजेंसियों के झांसे में न आने की सलाह दी गई है। खुफिया रिपोर्ट बताती है कि विदेशी धरती पर होने के कारण कई पूर्व सैनिक जान के डर और भारी दबाव के चलते टूट जाते हैं, जिसका फायदा दुश्मन एजेंसी उठा रही है।
हिरासत से लेकर जेल भेजने तक का खतरा
इनकार करने पर टॉर्चर सेल और किडनैपिंग जो पूर्व सैनिक देश के प्रति वफादारी दिखाते हुए जासूसी से मना करते हैं, उन्हें नरक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। आईएसआई ने इसके लिए एकांत हिरासत केंद्र बना रखे हैं। जासूसी के लिए मना करने पर सैलरी रोक दी जाती है। बीमार होने पर इलाज नहीं मुहैया कराया जाता। झूठे केसों में फंसाकर जेल भेजने या अपहरण कर यातनाएं देने की रिपोर्ट भी सामने आई हैं।
क्या और कैसी है यह साजिश?
सॉफ्ट टारगेट : 50 वर्ष के आसपास की उम्र वाले रिटायर फौजी।
लोकेशन : एयरपोर्ट, रिफाइनरी और पर्सनल सिक्योरिटी की आड़ में तैनाती।
हथकंडा : पुरानी यूनिट के संपर्क सूत्रों का इस्तेमाल कर डेटा चोरी करना।
खतरा : सूचना न देने पर एकांत केंद्रों में कैद और शारीरिक प्रताड़ना।
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