केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करते हुए सूबे के चुनाव का बिगुल बजा दिया है। 9 और 14 दिसंबर को दो चरणों में गुजरात विधानसभा के चुनाव संपन्न होंगे। पहले चरण में दक्षिण और सौराष्ट्र के इलाकों से चुनाव की शुरुआत कर आयोग ने भाजपा की राह आसान कर दी है।
यह वो इलाके हैं, जहां भाजपा को कांग्रेस के जातिगत कार्ड से कोई मुश्किल नहीं है। पार्टी की रणनीति सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात से अपने पक्ष में बयार बहाकर मध्य और उत्तर गुजरात के जातीय गणित को भेदने की रहेगी। दूसरे चरण में मध्य और उत्तर गुजरात के इलाकों में चुनाव होने हैं। ये वो इलाका है, जहां भाजपा अभी जातीय गणित में मुश्किलों का सामना कर रही है।
उत्तर गुजरात में पटेल आंदोलन के अगुवा हार्दिक पटेल का आधार है तो मध्य गुजरात में अल्पेश ठाकोर के रूप में ओबीसी फैक्टर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहा है। पहले चरण के तहत होने वाले चुनाव के इलाकों दक्षिण और सौराष्ट्र में इन नेताओं का आधार ज्यादा नहीं है, इसीलिए पहले चरण का चुनाव भाजपा के पाले का चुनाव माना जा रहा है। दक्षिण गुजरात में आदिवासी समुदाय का बोलबाला है, तो सौराष्ट्र में भाजपा के लिए राहत बताई जा रही है। यहां पीएम मोदी ने हाल ही में तमाम योजनाओं का उद्घाटन भी किया है। वैसे चुनाव के ऐलान से पहले ही भाजपा ने अपनी तैयारियां सुनिश्चित कर रखी हैं।
जीत के लिए भाजपा का होमवर्क पूरा
चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद जीत का दावा करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने कहा है कि वे राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दे पर जनता के बीच जाएंगे। उन्होंने दो तिहाई बहुमत के साथ भाजपा की जीत का दावा किया है। यदि भाजपा गुजरात में अपनी जीत दर्ज कर पाने में कामयाब रहती है तो उसकी यह लगातार पांचवी जीत होगी। वर्ष 1998 से लगातार सूबे में भाजपा की सरकार चली आ रही है।
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पार्टी के आला नेताओं का दावा है कि चुनाव की तारीखों के ऐलान से पूर्व ही भाजपा ने जीत का पंच लगाने के लिए अपने होमवर्क को पूरा कर लिया है। कांग्रेस पार्टी के जरिए पैदा किए जा रहे जातिगत दावों के बावजूद भाजपा न सिर्फ अपनी जीत के प्रति आश्वस्त है बल्कि उसे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मिशन 150 के पूरा होने की उम्मीद है। सूबे में जीत का पंच लगाने के लिए भाजपा ने बूथ स्तर से लेकर जनता को साधने तक की सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
केंद्रीय नेताओं की देखरेख में प्रदेश भाजपा बीते 5-6 महीनों से ही चुनावी मोड में है। पीएम नरेंद्र मोदी का लोकप्रिय चेहरा, माइक्रो प्रबंधन के धनी अमित शाह की रणनीति के बावजूद पार्टी ने अपने सबसे बड़े चुनाव प्रबंधनकार वित्त मंत्री अरुण जेटली को प्रदेश के चुनाव अभियान का प्रभारी बनाया है। तो शाह के सबसे करीबी समझे जाने वाले महासचिव भूपेंद्र यादव राज्य के भाजपा प्रभारी हैं।
नर्मदा यात्रा और गुजरात गौरव यात्रा सरीखी दो यात्राओं के जरिए भाजपा सूबे की जनता के बीच नीचे तक अपनी बात पहुंचा चुकी है। हालांकि सोशल मीडिया में विकास पागल हो गया सरीखा कांग्रेस की ओर से शुरू किया गया प्रचार बेशक उस पर भारी पड़ा है। मगर भाजपा रणनीतिकारों की मानें तो सोशल मीडिया की दीवार भी उन्होंने मजबूत बना ली है। विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रमों के जरिए पीएम मोदी की क्षेत्रवार सभाएं हो चुकी हैं। आयोग के जरिए चुनाव की घोषणा से पहले ही भाजपा ने अपना चुनावी होमवर्क पूरा कर लिया है।