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क्या 1989 को दोहरा पाएगी कांग्रेस? ग्रामीण vs शहरी मे तब्दील हो सकता है गुजरात चुनाव

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महासंग्राम - फोटो : SELF
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गुजरात विधानसभा चुनाव इस बार रोमांचक होने वाला है, ये कांग्रेस बनाम बीजेपी होने के साथ-साथ 'रूरल वर्सेज टाउन' भी होगा। क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों में ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस की वापसी के बाद राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा के पसीने छूट चुके हैं, वैसे शहरी क्षेत्रों में भाजपा ने अपनी पकड़ बना रखी है।
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हालांकि निकाय चुनावों को आने वाले चुनाव का सेमीफाइनल माना जाता रहा है और इस नतीजे से देखा जाए तो गुजरात विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर होगी। क्योंकि इस चुनाव में  कांग्रेस सिर्फ जीत के लिए उतर रही है और उसका मिशन है 150। यानी 182 में से कांग्रेस 150 सीटें जीतने के लिए उतरेगी।  

आपको बता दें कि मिशन 150 कांग्रेस का अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ने की वो कवायद है जिसके लिए वो इस चुनाव में पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है। गुजरात में 182 सीटों पर चुनाव होने हैं। इससे पहले कांग्रेस 1989 में 149 सीट जीतकर सत्ता में आई थी और उसे क्षत्रियों, हरिजनों, आदिवासी और मुसलमानों का समर्थन हासिल था।  
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बता दें कि निकाय चुनावों में कांग्रेस की बढ़त के बाद भाजपा के पशीने पर पसीना ला दिया था। निकाय चुनावों में 31 जिला पंचायतों में से 18 पर कांग्रेस ने बढ़त हासिल की थी जबकि महज 6 नगर निगम सीटों पर भाजपा ने अपनी बढ़त बनाई थी।
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BJP, Congress
इस जीत के बाद कांग्रेस ने मान लिया था कि यह जनता का फैसला और अगले चुनाव में गुजरात कांग्रेस का होगा। गुजरात में 118 सीटें ग्रामीण इलाकों में आती हैं बाकी की सीटें शहरों में आती है। 

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश के ज्यादातर निकायों में इससे पहले भाजपा का कब्जा था। जबकि  2010 में 30 जिला पंचायतों पर भाजपा ने कब्जा किया था। 230 तालुका पंचायतों की 4778 सीटों पर कांग्रेस 2204 और भाजपा 1798 पर आगे रही थी।

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इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि इसबार का गुजरात विधानसभा चुनाव ग्रामीण वर्सेज शहरी होगा और निकाय चुनावों में ग्रामीण इलाकों में पिछड़ने वाली भाजपा का पूरा ध्यान गांवों पर दिया है क्योंकि शहरी इलाकों में तो उसका  प्रदर्शन हमेशा की तरह मजबूत बना हुआ है। 
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