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गांधीनगर में भी दिख रही जातीय बयार, भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहे पाटीदार 

Mon, 11 Dec 2017 11:44 AM IST
संजय मिश्र
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गुजरात की राजधानी गांधीनगर की राजनीतिक तस्वीर भी सूबे की सियासी तस्वीर को ही बयान कर रही है। राज्य के अन्य इलाकों की तरह यहां भी चुनाव का मुद्दा विकास के बजाय सूबे के अन्य इलाकों की तरह जातीय है। विकास पर जातीय राजनीति हावी नजर आ रही है। यहां के सियासी नब्ज में जातीय बयार बहने से भाजपा की परेशानी बढ़ी हुई है। अनामत आंदोलन की वजह से पाटीदार समाज भाजपा के खिलाफ दिख रहा है। तो अल्पेश ठाकोर के बिरादरी वाले ठाकोर मतदाताओं के संख्या की इधर भरमार है।
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इस वजह से भाजपा को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि टिकट बंटवारे में पार्टी ने पाटीदारों और ओबीसी के बीच सामंजस्य बैठाने का प्रयास किया है। मगर जमीन पर हालात खुशनुमा नहीं दिख रहे हैं। गांधीनगर जिले की 5 सीटों में से 2 सीटों पर भाजपा ने पाटीदार बिरादरी के लोगों को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस के दमदार विधायक को तोड़कर अपने पाले में लाकर उम्मीदवार बनाने का भी खेल खेला है। मगर जाति गणित के खेल में यहां भाजपा की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। यहां पटेल और ठाकोर बिरादरी के मतदाताओं के बीच का गठजोड़ भाजपा को भारी पड़ रहा है। ऊपर से कांग्रेस की कमान प्रदेश प्रभारी अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत संभाले हुए हैं।

पाटीदार-ठाकोर के गठजोड़ की होगी परीक्षा 

आरक्षण आंदोलन को लेकर अलग-अलग धुरी पर नजर आ रहे ठाकोर और पाटीदार समाज के गठजोड़ की असल परीक्षा गांधीनगर में है। यहां पाटीदार और ठाकोर बिरादरी के मतदाताओं की संख्या अधिक है। यदि दोनों ही मतदाता साथ आएं तो कांग्रेस की राह इस पूरे जिले में आसान रह सकती है। वरना उसे खामियाजा उठाना पड़ सकता है। वैसे तो गांधीनगर में कांग्रेस पार्टी पिछले चुनाव में भी भाजपा पर भारी थी। जिले के 5 विधानसभा सीटों में से 3 पर कांग्रेस का कब्जा था। मात्र 2 सीटों पर ही भाजपा को जीत नसीब हुई थी। इस दफे पार्टी अपनी संख्या बढ़ाना चाहती है। मगर उसकी राह में रोड़ा पाटीदार और ठाकोर बिरादरी की एकजुटता है। यह एकजुटता जमीन पर नजर भी आ रही है।

माणसा विधानसभा के आजोल गांव के रहने वाले दीपक भाई पटेल का कहना है कि हार्दिक के साथ अन्याय हो रहा है। हमें अनामत (आरक्षण) मिले न मिले हम उसका समर्थन करेंगे। इसी गांव के राज्य मार्ग पर पान की दुकान चला रहे अमित भाई चौधरी सियासी दावा करते हुए कहते हैं कि कलोल से मोड़ासा तक भाजपा साफ है। कहीं भी विकास नहीं हुआ है। कांग्रेस के जरिए पाटीदार आरक्षण पर लॉलीपॉप थमाने के भाजपा के आरोपों पर माणसा के हिम्मत सिंह चौहान का कहना है कि कुछ न कुछ तो रास्ता निकलेगा। अगर कुछ नहीं होगा तो उस वक्त देखेंगे। 

वहीं माणसा-गांधीनगर मार्ग पर पान दुकान चलाने वाले अल्केश का कहना है कि वे कांग्रेस का साथ देंगे। अल्पेश ठाकोर उनके आदर्श हैं। बिरादरी पूछे जाने पर उन्होंने अपनी बिरादरी ठाकोर बताई। हालांकि उनके दुकान के बाहर खड़े दीपक का कहना है कि यहां कांग्रेस का जोर है मगर जीत भाजपा की ही होगी। वैसे जमीनी चर्चाओं को देख लगता है कि यहां ठाकोर और पाटीदार समाज का गठजोड़ कांग्रेस के पक्ष में काम करता दिख रहा है। पार्टी ने इस उम्मीद से ही अपनी ताकत झोंक रखी है। तो भाजपा भी पीछे नहीं है। कलोल में पीएम मोदी की सभा का आयोजन कराकर भाजपा ने बाजी अपने पक्ष में करने का दांव चला है।

वैभव गहलोत संभाल रहे हैं गांधीनगर की कमान 

कांग्रेस की ओर से गांधीनगर जिले की कमान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत संभाल रहे हैं। उनके सहयोगी के रूप में राजस्थान कांग्रेस के नेता धर्मेंद्र राठौर भी मोर्चे पर डटे हुए हैं। उम्मीदवारों के चयन में हुई थोड़ी बहुत चूक के बाद वैभव ने जिले में पार्टी की स्थिति को नियंत्रित कर लिया है। कांग्रेस की उम्मीदें यहां हार्दिक, अल्पेश और जिग्रेश मेवानी के गठजोड़ पर है। इनकी बिरादरी के मतों को साधने में ही कांग्रेस अपनी ताकत लगा रही है। ऊपर से नोटबंदी का मुद्दा ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की परेशानी बढ़ा रहा है। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को बखूबी भुना रही है। हालांकि जीएसटी यहां मुद्दा नहीं है। गांधीनगर में रहने वाले सरकारी कर्मचारी भी भाजपा की खिलाफत करते नजर आ रहे हैं। तो कलोल में ठेका नौकरी करने वालों को दिक्कते आ रही हैं।
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गांधीनगर की राजनीतिक गणित

गांधीनगर जिले में विधानसभा की 5 सीटें कलोल, देहगाम, गांधीनगर दक्षिण, माणसा और गांधीनगर उत्तर है। यहां दूसरे चरण के तहत 14 दिसंबर को मतदान होना है। 201488 मतदाताओं वाले माणसा सीट से भाजपा ने कांग्रेस के विधायक अजीत चौधरी को अपने पाले में लाकर उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। उनकी छवि दमदार नेता की है। मगर कांग्रेस ने यहां से सुरेश कुमार पटेल को उम्मीदवार बनाकर चौधरी को जातीय गणित में घेर दिया है। माणसा में कांग्रेस का पाटीदार-ठाकोर गठजोड़ चौधरी की राह में रोड़ा बन रहा है। इस सीट से भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को लेकर कुल 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। मगर मुख्य मुकाबला प्रमुख दोनों दलों के ही बीच है।

देहगाम में कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह राठौड़ को उम्मीदवार बनाया है तो भाजपा ने कल्याण सिंह चौहान को मैदान में उतारा है। पहले से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। गांधीनगर दक्षिण सीट पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार गुणवंत पटेल मुकाबले की कोशिश में जरूर हैं। मगर गांधीनगर दक्षिण का मुकाबला भी भाजपा के अशोक कुमार पटेल और कांग्रेस के सीजे चावड़ा के बीच है। यहां से कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। वर्ष 2007 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है।

कलोल सीट पर पीएम मोदी की रैली कराकर भाजपा ने अपनी बढ़त बनाने की कोशिश की है। मगर यहां ठेका मजदूरी के वजह से नौकरी जाने का मुद्दा बड़ा है। कलोल से भाजपा ने अतुल भाई पटेल को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने बलदेव जी चंदू जी ठाकोर को उम्मीदवार बनाया है। एनसीपी उम्मीदवार करसन ठाकोर यहां कांग्रेस की मुश्किलें  बढ़ा रहे हैं। यहां से कुल 9 उम्मीदवार चुनाव में किश्मत आजमा रहे हैं। इसके अलावा गांधीनगर उत्तर की सीट है। मुकाबला भाजपा के शंभू जी चेला जी ठाकोर और कांग्रेस के गोविंद जी हिरा जी सोलंकी के बीच है। यहां से चंदू भाई चौहान को मैदान में उतारा है। इस सीट पर कुल 10 उम्मीदवार मैदान में हैं। मगर जिले की सभी पांचों सीटों पर मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है।
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