सार
गुजरात के गांधीनगर में एक अविवाहित युवती को फ्लैट किराए पर नहीं मिल पाया क्योंकि पड़ोसी ने आपत्ति जताई। युवती ने दोस्तों संग फ्लैट लिया था, दलाल ने भी भरोसा दिया था। लेकिन पड़ोसी ने बिल्डर से शिकायत कर फ्लैट देने से मना करवा दिया। सोशल मीडिया पर मामला वायरल हुआ, लोगों ने इसे भेदभाव बताया और ऐसी परेशानियों की अपनी कहानियां साझा कीं।
गुजरात के गांधीनगर में एक युवती को सिर्फ इसलिए किराए का फ्लैट नहीं मिल पाया क्योंकि वह अविवाहित है। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। युवती के भाई ने सोशल मीडिया पर पूरी घटना साझा की, जिसमें बताया गया कि किस तरह उसकी बहन ने दोस्तों के साथ मिलकर फ्लैट किराए पर लिया था, लेकिन पड़ोसी की आपत्ति के कारण उन्हें फ्लैट छोड़ना पड़ा।
साझा की गई पोस्ट के मुताबिक युवती ने अपने दो अन्य दोस्तों के साथ तीन बीएचके फ्लैट किराए पर लिया था। उन्होंने दलाल को पैसे भी दे दिए और अपना सामान फ्लैट में शिफ्ट कर दिया। दलाल ने भरोसा दिया था कि अविवाहित लड़कियों को कोई समस्या नहीं होगी। लेकिन तभी पड़ोसी ने बिल्डर से शिकायत कर दी कि सिंगल लड़कियों को फ्लैट नहीं देना चाहिए। बिल्डर ने बिना कुछ सोचे समझे फ्लैट 'नोटिस' पर डाल दिया और रहने की अनुमति नहीं दी।
बात करने की कोशिश भी रही नाकाम
रेडिट की पोस्ट में बताया गया कि युवती ने पड़ोसी से बात करने की कोशिश की ताकि उन्हें यकीन दिलाया जा सके कि वे कोई परेशानी नहीं पैदा करेंगी। लेकिन पड़ोसी ने बात सुनने से इनकार कर दिया। उसने युवती की कॉल काट दी और बाद में हर जगह से ब्लॉक कर दिया। इससे युवती और उसके परिवार को दोबारा घर ढूंढने और शिफ्टिंग में खर्च उठाना पड़ा।
लोगों ने इसे भेदभाव बताया
युवती के भाई ने लिखा कि यह सिर्फ निराशाजनक नहीं बल्कि भेदभावपूर्ण भी है। सब कुछ पूरा होने के बाद सिर्फ अविवाहित होने के आधार पर किसी को घर से निकाल देना सामाजिक संकीर्णता को दिखाता है। इस पोस्ट पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी और बताया कि भारत में अभी भी अविवाहित लड़कों-लड़कियों के लिए किराए का मकान ढूंढना कितना मुश्किल है।
ये भी पढ़ें: ग्वालियर चंबल अंचल में मूसलाधार बारिश से जीवन अस्त व्यस्त, उफान पर नदियां; कई गांव के संपर्क टूटे
दूसरों ने भी सुनाई अपनी आपबीती
इस पोस्ट के वायरल होते ही कई लोगों ने अपनी परेशानियां साझा कीं। एक व्यक्ति ने लिखा कि गुजरात में ऐसा ही होता है। स्टूडेंट्स और बैचलर के लिए जो फ्लैट मिलते हैं, उनकी हालत बेहद खराब होती है, जबकि किराया आसमान छूता है। वहीं, एक अन्य ने लिखा कि मुंबई में 20 साल पहले मेरे साथ भी ऐसा हुआ था। अविवाहित महिलाओं को फ्लैट नहीं दिया जाता था। उम्मीद है अब चीजें बदली होंगी।
ये भी पढ़ें: पटना क्लब से लौट रहे बिहार के नामी उद्योगपति की हत्या; 6 साल पहले बेटे और अब गोपाल खेमका को मार डाला
किराए की रकम वापस लेने की सलाह भी मिली
कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि युवती को दलाल और बिल्डर से खर्च और एडवांस रकम वापस लेनी चाहिए। कई लोगों ने लिखा कि भारत में लोग पड़ोसी के घर में ज्यादा दखल देते हैं, चाहे वह परिवार हो या बैचलर। इसी वजह से अकेले रहने वाले लड़कों और लड़कियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। फिलहाल सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर लगातार बहस जारी है।