फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार को दिया झटका, रद्द किया सवर्णों को दिया आरक्षण

Thu, 04 Aug 2016 12:48 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
दिल्‍ली हाईकोर्ट द्वारा केजरीवाल सरकार को झटका देने के कुछ देर बाद ही गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की भाजपा सरकार को जोरदार झटका दे दिया है। शीर्ष अदालत ने आनंदीबेन सरकार द्वारा राज्य में आर्थिक रूप से पिछडों को दिया गया दस फीसदी आरक्षण रद कर दिया है। 
विज्ञापन


मुख्यमंत्री आनंदीबेन ने इस आरक्षण की घोषणा पाटीदार आंदोलन के बाद की थी, जिसमें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में छह लाख सालाना आय से कम वालों को दस फीसदी आरक्षण दिया जाना था। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस आदेश को आरक्षण के लिए तय कोटे से ज्यादा का अतिक्रमण माना है। कोर्ट ने राज्य सरकार के इस आदेश को गैरजरूरी मानते हुए निरस्त कर दिया। 
विज्ञापन

पाटीदार आंदोलन के बाद आनंदीबेन ने की घोषणा

बता दें कि गुजरात में चले जबरदस्त पाटीदार आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने डैमेज कंट्रोल और पटेलों को मनाने के लिए आर्थिक आधार पर दस फीसदी आरक्षण की घोषणा की थी। जिसमें ईसीबी अर्थात आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में दस फीसदी आरक्षण दिया जाना था। 

यह आरक्षण राज्य में पहले से ही मिल रहे 49 फीसदी आरक्षण के कोटे से अलग था। तत्कालीन आनंदीबेन सरकार ने पाटीदार आंदोलन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए बीते एक मई को आनन फानन में इस आरक्षण की घोषणा की थी। जिसे बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

बुधवार को हाईकोर्ट ने इस पर अपना निर्णय सुनाते हुए इसे रद्द कर दिया। बताया जाता है कि तय कोटे से ज्यादा की सीमा लांघने के कारण ही इसे रद्द किया गया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय कर रखी है। 

आनंदीबेन सरकार का ईसीबी को आरक्षण देने का निर्णय इस आदेश का उल्लंघन कर रहा था इसी आधार पर इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
विज्ञापन

तय सीमा से ज्यादा आरक्षण देने पर कोर्ट ने दिया झटका

बता दें कि राजस्‍थान के बाद गुजरात दूसरा राज्य था जिसने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का फैसला किया था। राजस्‍थान में गरीब सवर्णों को 14 फीसदी आरक्षण की घोषणा की गई थी हालांकि बाद में कोर्ट ने उसे भी रद कर दिया था। 

वहीं हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पाटीदार नेता और गुजरात में पटेलों को आरक्षण के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा करने वाले हार्दिक पटेल ने कहा कोर्ट का यह आदेश सरकार के मुंह पर तमाचा है। 

सरकार की गलत नीतियों के कारण ही उसे कोर्ट से मुंह की खानी पड़ी। हार्दिक ने कहा अब पाटीदार ओबीसी में आरक्षण के लिए और मजबूती से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें