गुजरात सरकार ने सोमवार को पीएमजेएवाई-एमए (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-मुख्यमंत्री अमृतम) पैनल में शामिल अस्पतालों के लिए कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी और नवजात प्रक्रियाओं के लिए नया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी किया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रुशिकेश पटेल ने कहा कि यह नीति कदाचार और आपराधिक गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
क्या है मामला?
यह नया एसओपी अहमदाबाद के ख्याति मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल में हुए एक मामले के बाद आया, जिसमें दो पीएमजेएवाई लाभार्थियों की एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल ने गांवों में मुफ्त जांच शिविर आयोजित किए थे ताकि बिना किसी मेडिकल आवश्यकता के पीएमजेएवाई कार्डधारकों को एंजियोप्लास्टी कराने के लिए मजबूर किया जा सके। दो को 'आपातकालीन' श्रेणी में दिखाकर सरकारी मंजूरी हासिल की थी। उसके बाद अस्पताल ने केंद्रीय योजना के तहत भुगतान का दावा किया था।
यह हैं नए नियम
नए मानक संचालन प्रक्रिया के तहत, कार्डियोलॉजी से संबंधित प्रक्रियाओं के लिए अस्पतालों को एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की वीडियोग्राफी को पूर्व-स्वीकृति चरण में अपलोड करना अनिवार्य होगा। आपातकालीन स्थिति में, इसे उपचार के बाद अपलोड किया जाएगा। इसके अलावा, अस्पतालों को ट्यूमर बोर्ड का प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा, जो चिकित्सा, शल्यचिकित्सा और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट का संयुक्त पैनल होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपचार योजना मरीज की आवश्यकता के अनुसार तय की गई हो।
नवजात देखभाल के लिए, अस्पतालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक पूर्णकालिक बालरोग विशेषज्ञ उपलब्ध हो और नर्सिंग स्टाफ की संख्या मरीजों की बेड संख्या के अनुपात में हो।
'मरीजों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी सरकार'
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उन गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी जो मरीजों की जान से खिलवाड़ करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह नई एसओपी कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी, नवजात देखभाल और कुल घुटना प्रतिस्थापन (TKR)/कुल कूल्हा प्रतिस्थापन (THR) सेवाओं को कवर करती है।
इसके अलावा, अस्पतालों को गुणवत्ता नियंत्रण मानकों का पालन करते हुए रीडियोथेरेपी मशीन के रिकॉर्ड को अनिवार्य रूप से बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
75 अस्पताल पर लगा चुके हैं जुर्माना
गुजरात सरकार ने पहले ही टीकेआर/टीएचआर उपचार के लिए एक नई एसओपी तैयार की थी और इसके उल्लंघन के लिए 75 अस्पतालों पर 3.51 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।