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Gujarat Election: सरदार पटेल की प्रतिमा बदल रही केवड़िया की तस्वीर, आदिवासी वोटर्स के बीच पैठ बनाने की कोशिश

केवडिया से अमित शर्मा की रिपोर्ट Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 27 Nov 2022 11:02 PM IST

सार

गुजरात की राजनीति के जानकार  बताते हैं कि 'स्टैचू ऑफ यूनिटी' की स्थापना के बाद इन आदिवासी इलाकों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े-बड़े होटल घरानों ने अपने होटल स्थापित करने शुरू कर दिए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हो रहा है और इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाओं को बल मिला है। 
 
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स्टैचू ऑफ यूनिटी। - फोटो : अमर उजाला

आदिवासी इलाकों में कांग्रेस हमेशा से मजबूत रही है।  ग्रामीण मतदाताओं के बीच पुराने दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की पकड़ का असर आज तक महसूस किया जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने जिन सीटों पर सफलता हासिल की थी, उनमें ग्रामीण क्षेत्रों की आदिवासी बहुल इलाकों की सीटें ही सबसे ज्यादा थी। लेकिन एक रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासी मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की कोशिश की है। राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू को अवसर देना और केवड़िया में सरदार पटेल की एकता मूर्ति की स्थापना को उनकी इस कोशिश से जोड़कर देखा जाता है।

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स्टैचू ऑफ यूनिटी। - फोटो : अमर उजाला
आदिवासी इलाकों में कांग्रेस हमेशा से मजबूत रही है।  ग्रामीण मतदाताओं के बीच पुराने दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की पकड़ का असर आज तक महसूस किया जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने जिन सीटों पर सफलता हासिल की थी, उनमें ग्रामीण क्षेत्रों की आदिवासी बहुल इलाकों की सीटें ही सबसे ज्यादा थी। लेकिन एक रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासी मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की कोशिश की है। राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू को अवसर देना और केवड़िया में सरदार पटेल की एकता मूर्ति की स्थापना को उनकी इस कोशिश से जोड़कर देखा जाता है।

स्टैचू ऑफ यूनिटी परिसर। - फोटो : अमर उजाला
स्टैचू ऑफ यूनिटी को देखने के लिए आए भाविक मेहता ने अमर उजाला से बताया कि गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक ढांचे की उपलब्धता और अन्य कारणों से लगातार विकास हो रहा था, लेकिन दक्षिण गुजरात के इस इलाके में कोई बड़ा धार्मिक-औद्योगिक केंद्र न होने के कारण यह क्षेत्र पिछड़ रहा था। सरदार पटेल की विश्व की सबसे बड़ी और सबसे ऊंची मूर्ति स्थापित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र को विकास से जोड़ दिया है। यहां हजारों पर्यटक प्रतिदिन मूर्ति को देखने के लिए आते हैं और अपने साथ यहां के लोगों के लिए रोजगार की नई संभावनाओं को भी लेकर आते हैं।  इससे यहां के युवाओं को रोजगार मिल रहा है और उनकी आगे बढ़ने की नई संभावनाओं को पैदा कर रहा है। गुजरात चुनाव पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि देश को आगे बढ़ाने के लिए बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और अवसर मिलना चाहिए।

केवडिया गुजरात। - फोटो : अमर उजाला
गुजरात की राजनीति के जानकार  बताते हैं कि 'स्टैचू ऑफ यूनिटी' की स्थापना के बाद इन आदिवासी इलाकों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े-बड़े होटल घरानों ने अपने होटल स्थापित करने शुरू कर दिए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हो रहा है और इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाओं को बल मिला है। 

शहरी चकाचौंध से दूर आदिवासी इलाकों में कांग्रेस की पकड़ के बीच आम आदमी पार्टी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है। आदिवासियों के घरों पर लहराते आम आदमी पार्टी के झंडे उसकी आदिवासियों के बीच उपस्थिति को दर्ज कराती हुई देखी जा सकती हैं।  छोटू भाई वसावा के साथ अरविंद केजरीवाल का गठबंधन होता, तो आम आदमी पार्टी को इन क्षेत्रों में ज्यादा सफलता मिल सकती थी, लेकिन अब उसे अपने ही दम पर अपनी पैठ बनाने की कोशिश करनी है। 

ऐसे में उसे कितने सीटों पर सफलता मिल पाएगी, यह कहना मुश्किल है लेकिन मतदाताओं का एक हिस्सा उनकी तरफ आकर्षित हो रहा है और कांग्रेस नेता इससे चिंतित हैं। वे जानते हैं कि आदिवासी इलाकों में केजरीवाल की पहुंच उनकी आगामी संभावनाओं को धूमिल कर सकता है।
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