सारवइया एक पत्थर खदान में काम करता था और उसका परिवार अंकोलाली गांव में इकलौता दलित परिवार था। सारवइया ने खनन लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जिसका कई ग्रामीण विरोध कर रहे थे। सारवइया पक्ष के वकील गोविंद परमार के मुताबिक, इन सभी ने मिलकर साजिश रची।
धीरू कोली ने अपनी बेटी का अपहरण कर अपने घर पर छिपाने का आरोप सारवइया पर लगाया। 13 सितंबर, 2012 को धीरू और अन्य लोगों ने सारवइया के घर पर बाहर से ताला लगाकर उसे अंदर बंद कर दिया। इसके बाद घर पर केरोसीन तेल छिड़ककर आग लगा दी गई, जिसमें जलकर सारवइया की मौत हो गई थी।