पुलिस उपाधीक्षक सुरजीत महेदू ने बताया कि घटना में आरोपी झोलाछाप डॉक्टर को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही उसके और बच्ची की मां के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 324 (स्वेच्छा से किसी भी उपकरण से चोट पहुंचाना) और अन्य प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
गुरुवार में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के पोरबंदर जिले में एक नीम हकीम ने खांसी से पीड़ित दो महीने की बच्ची को गर्म लोहे की छड़ से दागा। पुलिस ने रविवार को इस मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने यह भी बताया कि गर्म लोहे की छड़ से दागने के बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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पुलिस उपाधीक्षक सुरजीत महेदू ने कहा कि बच्ची को एक हफ्ते पहले खांसी और कफ हुआ था। जिसके बाद उसके माता-पिता ने घर पर स्थानीय इलाज की कोशिश की, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद बच्ची की मां उसे एक नीम हकीम देवराजभाई कटारा के पास ले गई।
कटारा ने कथित तौर पर खांसी का इलाज करने के नाम पर बच्ची के सीने और पेट को गर्म लोहे की छड़ से दागा। इसके बाद भी जब उसे राहत नहीं मिली तो माता-पिता बच्ची को पोरबंदर के भवसिंहजी जनरल अस्पताल ले गए। वहां ये मामला सामने आया।
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पुलिस उपाधीक्षक सुरजीत महेदू ने बताया कि घटना में आरोपी झोलाछाप डॉक्टर को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही उसके और बच्ची की मां के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 324 (स्वेच्छा से किसी भी उपकरण से चोट पहुंचाना) और अन्य प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। ये एफआईआर बच्ची के पिता की शिकायत के आधार पर दर्ज कराई गई है।
वहीं, अस्पताल के डॉ. जय बडियानी ने बच्ची की हालत के संबध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्ची को सांस लेने में दिक्कत होने पर 9 फरवरी को अस्पताल लाया गया था। उसे आईसीयू में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। इलाज के दौरान पता चला कि उसके सीने पर दागा गया था। जिससे मुश्किलें बढ़ गईं।