कनाडा से अवैध रूप से अमेरिका में घुसने की कोशिश में मारे गए चार भारतीयों की मौत मामले में गुजरात की मेहसाणा पुलिस ने कार्रवाई की है। मेहसाणा पुलिस ने इस घटना के करीबन एक माह से भी ज्यादा समय बाद तीन एजेंटों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीनों एजेंट अवैध आव्रजन रैकेट में शामिल थे। गौरतलब है कि जिन भारतीयों की मौत वहां हुई थी, वे गुजरात के मेहसाणा जिले के विजापुर तालुका के मानेकपुरा-डभल गांव के रहने वाले थे।
पुलिस ने एफआईआर में बताया है कि तीनों एजेंटों ने यहां मृतक के परिजनों से कथित रूप से 60 लाख रुपये लिए थे और चार पीड़ितों को खराब मौसम के बीच अमेरिका-कनाडा सीमा पर सेंट लॉरेंस नदी पार करने के लिए नाव की सवारी करने के लिए मजबूर किया। मेहसाणा के वसई पुलिस थाने के निरीक्षक जे एस रबारी ने बताया कि जब वे नदी पार कर रहे खे तभी नाव डूब गई थी। इस घटना में मरने वाले भारतीयों की पहचान प्रवीणभाई चौधरी (50), उनकी पत्नी दक्षा (45), उनका बेटा मीत (20) और बेटी विधी (24) के रूप में हुई थी।
जे एस रबारी ने कहा कि उन्होंने मृतक भारतीयों के एक रिश्तेदार की शिकायत के आधार पर अवैध रूप से सीमा पार कराने वाले तीन एजेंट्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एफआईआर के मुताबिक तीनों के नाम क्रमश: निकुलसिंह विहोल, सचिन विहोल और अर्जुनसिंह चावड़ा हैं। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
प्रवीणभाई के छोटे भाई अश्विनभाई द्वारा की गई शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, मृतक परिवार तीन फरवरी को एक टूरिस्ट वीजा पर छुट्टी मनाने कनाडा गया था। जब निकुलसिंह को इसका पता चला तो उन्होंने प्रवीणभाई को फोन किया और अपने संपर्कों के माध्यम से परिवार को अमेरिका भेजने की पेशकश की। इस दौरान उसने बिना किसी परेशानी के सीमा पार करने में परिवार की मदद के लिए कथित तौर पर 60 लाख रुपये मांगे। निकुल सिंह की बात से प्रभावित होकर प्रवीणभाई ने अश्विनभाई को 60 लाख रुपये नकद निकुलसिंह को देने के लिए कहा। प्राथमिकी में कहा गया है कि इसके लिए शिकायतकर्ता ने ऋण लिया और भुगतान करने के लिए अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से पैसे उधार लिए।
रुपयों की व्यवस्था हो जाने के बाद निकुलसिंह और अर्जुनसिंह ने 23 मार्च को विजापुर में एक मंदिर के पास नकदी ली। वहीं, तीसरे एजेंट सचिन ने कनाडा में रहकर सीमा पार कराने की व्यवस्था की। पैसे लेते वक्त दोनों ने शिकायतकर्ता से कहा कि सचिन चौधरी परिवार को टैक्सी में अमेरिका ले जाएगा। बाद में सचिन जोकि परिवार के साथ था उसने योजना बदल दी और प्रवीणभाई से कहा कि उन्हें एक नाव में सीमा पार करनी है। उस समय क्षेत्र में मौसम खराब था, जिसको देखते हुए परिवार ने तुरंत इस पेशकश को खारिज कर दिया। इसके बावजूद सचिन ने यह दावा करते हुए कि वे सिर्फ पांच से सात मिनट में दूसरी तरफ पहुंच जाएंगे और चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं सचिन ने यह भी कहा कि अगर वे नाव से सीमा पार करने से इनकार करते हैं, तो उन्हें ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा। इसके बाद मजबूरन परिवार नाव पर सवार हुआ।
एफआईआर में आगे कहा गया है कि 30 मार्च को नाव पर चढ़ने के बाद विधि ने अश्विन भाई को मैसेज किया कि बीच रास्ते में कई बार नाव का इंजन बंद हुआ था। इसके कुछ समय बाद, अश्विनभाई का परिवार से संपर्क टूट गया। एफआईआर में कहा गया है कि जब अश्विनभाई ने परिवार की स्थिति जानने के लिए निकुलसिंह से संपर्क किया तो निकुलसिंह ने पहले कुछ बहाने बनाए और फिर उसने अपना फोन बंद कर दिया और अर्जुनसिंह के साथ भूमिगत हो गए।
बता दें कि कनाडा सीमा पर हुए इस हादसे को लेकर कनाडाई पुलिस ने जानकारी दी थी कि चार लोगों के शव 30 मार्च को कनाडा में क्यूबेक और अमेरिका में न्यूयॉर्क के बीच सेंट लॉरेंस नदी के तट पर पाए गए थे। बाद में चारों मृतकों का अंतिम संस्कार कनाडा में 10 अप्रैल को वहां रहने वाले उनके कुछ रिश्तेदारों की मदद से किया गया था।