साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए गुजरात पुलिस मंगलवार से राज्य के सभी जिलों में 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत उन म्यूल बैंक खातों पर शिकंजा कसा जाएगा, जिनका इस्तेमाल साइबर ठग ऑनलाइन धोखाधड़ी से हासिल रकम को प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और धन शोधन के लिए करते हैं।
कब लिया गया फैसला?
इस संबंध में फैसला सोमवार रात उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की अध्यक्षता में आयोजित राज्यव्यापी समीक्षा बैठक में लिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में पुलिस महानिदेशक केएलएन राव समेत वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जबकि सभी शहरों के पुलिस आयुक्त और जिला पुलिस प्रमुख वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
बैठक में क्या दिए गए निर्देश?
बैठक में अधिकारियों को पूरे राज्य में सक्रिय म्यूल खातों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक चलाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को साइबर ठगी से बचाना और संगठित साइबर अपराध को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करना है। एक अधिकारी के अनुसार, यह बैठक साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई की समीक्षा और प्रवर्तन उपायों को और मजबूत करने के लिए आयोजित की गई थी।
ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 कैसे रहा सफल?
यह नया अभियान 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' की सफलता के बाद शुरू किया जा रहा है। गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा 1 से 31 दिसंबर 2025 तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड लेनदेन का खुलासा हुआ था। इस दौरान 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने 913 म्यूल खातों के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिन्हें देशभर में दर्ज 4,000 से अधिक साइबर अपराध मामलों से जोड़ा गया था। जांच में सामने आया कि ये खाते साइबर अपराधियों के लिए वित्तीय रीढ़ का काम करते हैं, जिनकी मदद से चोरी की रकम को कई खातों में घुमाकर उसका पता लगाना मुश्किल बना दिया जाता है।
जांच एजेंसियों ने संदिग्ध लेनदेन की पहचान और साइबर ठगी के नेटवर्क तक पहुंचने के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर हेल्पलाइन 1930 के आंकड़ों का सहारा लिया।
पुलिस के अनुसार, 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत इस वर्ष पहले ही कई बड़ी सफलताएं हासिल की जा चुकी हैं। अलग-अलग अभियानों में 53.55 करोड़ रुपये और 288 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया। इन मामलों में अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, भावनगर और आनंद समेत कई शहरों से कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि संगठित गिरोह ऑनलाइन ठगी से हासिल अवैध धन को छिपाने और इधर-उधर भेजने के लिए बड़े पैमाने पर म्यूल खातों का इस्तेमाल कर रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि अभियान के नए चरण में ऐसे खातों की पहचान, उन्हें फ्रीज करने और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।