गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस बार 15 नगर निगमों और जिला पंचायतों सहित करीब 10 हजार सीटों पर वोट डाले जाएंगे। पूर्व आईपीएस एमएल निनामा और आरजे आभा जैसे चर्चित चेहरों ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। मुख्य टक्कर भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच है।
गुजरात में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए शनिवार को नामांकन का अंतिम दिन गहमागहमी और भारी उत्साह से भरा रहा। राज्य के राजनीतिक मैदान में अपनी किस्मत आजमाने के लिए उम्मीदवारों का तांता लगा रहा। 26 अप्रैल को होने वाले इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच माना जा रहा है। वहीं, एनसीपी और एआईएमआईएम की मौजूदगी ने कई सीटों पर मुकाबले को बहुकोणीय और दिलचस्प बना दिया है।
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आखिरी मिनट की भागदौड़
शनिवार को नजारा कुछ ऐसा था कि कई उम्मीदवार अपनी पार्टी का आधिकारिक पत्र हाथ में लिए दफ्तरों की ओर दौड़ते नजर आए। अंतिम समय में टिकटों की घोषणा होने के कारण उम्मीदवारों के पास कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए बहुत कम समय बचा था। वहीं, टिकट न मिलने से नाराज कुछ नेताओं ने अपनी पार्टियों के खिलाफ खुलकर असंतोष भी जाहिर किया।
मैदान में उतरे कई चर्चित चेहरे
इस बार के चुनाव में कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल हैं, जो राजनीति के पुराने खिलाड़ी नहीं हैं, लेकिन अपनी लोकप्रियता के दम पर चुनाव जीतना चाहते हैं। इसमें पूर्व आईपीएस एमएल निनामा शामिल हैं। हाल ही में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर भाजपा में शामिल हुए पूर्व पुलिस अधिकारी निनामा अरावली जिला पंचायत की ओढ़ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
वार्डों का नए सिरे से हुआ है परिसीमन
वहीं, राजकोट की मशहूर रेडियो जॉकी आरजे आभा ने कांग्रेस के टिकट पर राजकोट नगर निगम के वार्ड नंबर 10 से पर्चा भरा है। ये चुनाव इस मायने में भी खास हैं क्योंकि इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग के संशोधित आरक्षण नियमों के तहत कराया जा रहा है। इसके लिए कई जिलों में वार्डों का नए सिरे से परिसीमन और पुनर्गठन किया गया है, जिसने चुनाव की पूरी बिसात बदल दी है।
चुनावी कैलेंडर पर एक नजर
नामांकन के बाद अब 13 अप्रैल को दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जो उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, वे 15 अप्रैल तक ऐसा कर सकते हैं। 26 अप्रैल को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा और 28 अप्रैल को नतीजों की घोषणा के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि गुजरात की स्थानीय सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी।