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जेल में ही कटेगी नारायण साईं की रातें: गुजरात हाईकोर्ट ने ठुकराई जमानत याचिका, उम्रकैद की सजा रहेगी बरकरार

Tue, 05 May 2026 10:20 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, अहमदाबाद

सार

गुजरात हाईकोर्ट ने नारायण साईं की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर साफ कर दिया है कि रसूख या देरी की रणनीति से न्याय प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जा सकता। संगीन जुर्म के साये में घिरे साईं को अब सलाखों के पीछे ही रहकर अपनी अपील के फैसले का इंतजार करना होगा। क्या है पूरा मामला? खबर में जानिए...
 
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नारायण साईं को हाईकोर्ट से झटका - फोटो : @ANI
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विस्तार
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गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को स्वयंभू संत आसाराम के बेटे नारायण साईं को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने साल 2001 के दुष्कर्म मामले में साईं की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति इलेश वोरा और न्यायमूर्ति आरटी वच्छानी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। खंडपीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
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अदालत की कड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अपराध बेहद गंभीर श्रेणी का है। हमारे लिए प्रथम दृष्टया निष्कर्ष पर पहुंचना कठिन है कि आवेदक-दोषी के पास अपील की, अदालत से बरी होने की उचित संभावना है। जजों ने साफ तौर पर कहा कि गुण-दोष के आधार पर सजा को स्थगित करने और जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं मिला है।

सुनवाई में देरी की रणनीति
अदालत ने नारायण साईं के आचरण पर भी सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने नोट किया कि साईं 11 साल की जेल काट चुके हैं, लेकिन 2019 से वे अपनी अपील की अंतिम सुनवाई में सहयोग नहीं कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि नारायण साईं बार-बार अस्थायी या स्थायी जमानत की अर्जी दाखिल करके कार्यवाही में देरी करने की रणनीति अपना रहे हैं। खंडपीठ के अनुसार, उनकी दिलचस्पी अपील की त्वरित सुनवाई में बिल्कुल नहीं है।
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क्या है पूरा मामला?
सूरत की एक अदालत ने अप्रैल 2019 में नारायण साईं को एक पूर्व महिला अनुयायी की ओर से दर्ज कराए गए दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला 2013 में दर्ज हुआ था। साईं को भारतीय दंड संहिता की धारा 376-दुष्कर्म, 377-अप्राकृतिक अपराध, 323-हमला, 506(2)-आपराधिक धमकी और 120-(बी)- साजिश के तहत दोषी ठहराया गया था। इस मामले में उनके सहयोगियों धर्मिष्ठा उर्फ गंगा, भावना उर्फ जमुना और पवन उर्फ हनुमान को भी 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

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