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गुजरात: हाईकोर्ट ने PIL दाखिल करने पर याचिकाकर्ताओं पर लगाया 1.4 करोड़ रुपये का जुर्माना, जानें क्या है मामला

Tue, 15 Jul 2025 10:37 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

Gujarat High Court: गुजरात हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका दाखिल करने वाले सात याचिकाकर्ताओं पर 1.4 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। प्रत्येक याचिकाकर्ता पर 20-20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 
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गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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गुजरात हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल करने वाले सात याचिकाकर्ताओं पर कुल 1.4 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है। इन याचिकाकर्ताओं द्वारा एक बिल्डर को दी गई विकास कार्य की अनुमति को रद्द करने की मांग करते हुए एक पीआईएल दायर की थी, लेकिन अपनी पहचान और पृष्ठभूमि का खुलासा नहीं किया था। कोर्ट ने इसे "व्यक्तिगत द्वेष" से प्रेरित याचिका बताया।

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गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रे की खंडपीठ ने रिट याचिका को 20,00000 रुपये के दंड के साथ खारिज कर दिया, जिसका भुगतान प्रत्येक (सात) याचिकाकर्ता को करना होगा। सोमवार को कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश में कहा गया है कि यह राशि गुजरात राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को जाएगी, जिसका उपयोग अनाथ बच्चों के लाभ के लिए किया जाएगा।

प्रत्येक पर 20 लाख का लगाया जुर्माना
पिछले शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि ऐसी "बेईमान याचिकाओं" के लिए न्यायालय में कोई स्थान नहीं है। जिनमें याचिकाकर्ताओं अपनी पहचान ही नहीं बता रहे हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की, ये लोग कौन हैं, कोई नहीं जानता। ये क्या काम करते हैं, क्या व्यवसाय है, कुछ नहीं बताया गया। ये सभी स्वतंत्र व्यक्ति हैं, इसलिए प्रत्येक पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 
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कोर्ट ने आगे कहा कि जब तक याचिकाकर्ता अपनी पहचान नहीं बताते, तब तक उनकी शिकायत पर विचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। केवल नाम देकर किसी को पीआईएल दाखिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया, हमारे नियम और पीआईएल से संबंधित कानून भी यही कहते हैं कि जो भी व्यक्ति जनहित याचिका लेकर आता है, उस पर यह जिम्मेदारी होती है कि वह साबित करे कि वह एक जनहितकारी व्यक्ति है।

प्रतिवादी की ओर से वकील ने बताया कि याचिकाकर्ताओं पर उसी संपत्ति को लेकर जबरन वसूली का आरोप है और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। वे व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी हैं और निजी दुश्मनी के चलते निर्माण कार्य में खामियां दिखाकर याचिका दायर कर रहे हैं।

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'जनहित याचिका की आड़ में नहीं कर सकते अपनी व्यक्तिगत शिकायतें'
कोर्ट ने कहा कि विकास अनुमति नियमों के तहत दी गई है और याचिकाकर्ता यदि चाहे तो व्यक्तिगत शिकायत को लेकर अलग से याचिका दाखिल कर सकते थे। लेकिन इसे जनहित का मुद्दा बताकर निजी गड़बड़ी को उजागर करना पीआईएल की मर्यादा का उल्लंघन है। पीठ ने कहा, आप जनहित याचिका की आड़ में अपनी व्यक्तिगत शिकायतें और दुर्भावनाएं उजागर करना चाहते हैं। आप यह नहीं कह सकते कि प्राधिकरण की निष्क्रियता के खिलाफ याचिका है, और इस तरह बच नहीं सकते।

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