गुजरात हाईकोर्ट ने जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की उस याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 1996 के मादक पदार्थ जब्ती मामले में अपने मुकदमे को किसी अन्य न्यायाधीश के पास स्थानांतरित करने का आग्रह किया था। अदालत ने कहा कि वह 'कानूनी प्रक्रिया का लगातार दुरुपयोग' कर रहे हैं। जस्टिस समीर दवे ने कहा कि भट्ट की दोनों याचिकाएं खारिज की जाती हैं। न्यायाधीश ने कार्यवाही पर एक महीने की रोक लगाने की भट्ट के वकील की गुजारिश को भी नहीं माना।
भट्ट ने जून में अपने मुकदमे को पीठासीन न्यायाधीश के पास से वरिष्ठतम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित करने के लिए बनासकांठा के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश के समक्ष एक याचिका दायर की थी। याचिका खारिज होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।
उड़ीसा हाईकोर्ट ने 16 साल पहले रिश्वत मामले में दोषी ठहराए गए डॉक्टर को किया बरी
उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक विशेष सतर्कता अदालत के दोषसिद्धि आदेश को रद्द करते हुए एक सरकारी डॉक्टर प्रदीप्त कुमार पुरोहित को बरी कर दिया। उसे 16 साल पहले एक मरीज से अनुकूल मेडिको-लीगल रिपोर्ट जारी करने के एवज में 300 रुपये की रिश्वत लेने पर एक साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। न्यायमूर्ति एसके साहू की पीठ ने सोमवार को सतर्कता अदालत के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि रिश्वत देने वाले की पेशकश और लोक सेवक की मांग को अभियोजन पक्ष अभी तक साबित नहीं कर सका है। केवल रिश्वत स्वीकार कर लेना या प्राप्त करना ही इसे अपराध नहीं बनाता है।
पुरोहित को राज्य पुलिस की भ्रष्टाचार विरोधी शाखा ने 14 सितंबर, 1998 को गिरफ्तार किया था, उस समय वह नवरंगपुर जिले के काठीगुडा सरकारी अस्पताल में सहायक सर्जन के रूप में काम कर रहे थे।
गौहाटी हाईकोर्ट से जस्टिस नानी तागिया का पटना हाईकोर्ट तबादला
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गौहाटी हाईकोर्ट के जज जस्टिस नानी तागिया को पटना हाईकोर्ट में स्थानांतरित किए जाने की सिफारिश की है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने जस्टिस तागिया के उस अनुरोध को नहीं माना जिसमें उन्होंने खुद को या तो गौहाटी हाईकोर्ट में रहने देने या त्रिपुरा हाईकोर्ट में भेजने की मांग की थी।