गुजरात में हुए 400 करोड़ के मत्स्य पालन घोटाला मामले में दो पूर्व मंत्रियों परसोत्तम सोलंकी और दिलीप संघानी की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। गुजरात उच्च न्यायालय ने दोनों ही पूर्व भारतीय जनता पार्टी नेताओं की रिहाई से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है।
सोलंकी और संघानी की याचिका खारिज
न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक की अदालत ने शुक्रवार को सोलंकी और संघानी और एक अन्य व्यक्ति अर्जुन सुथारिया की याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका में भ्रष्टाचार रोधी विशेष अदालत के 12 मार्च 2021 के फैसले को चुनौती दी गई थी। आपको बता दें कि 12 मार्च 2021 को विशेष अदालत ने इस मामले में सभी आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि, इससे पहले उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
आपराधिक कार्यवाही पर लगाई रोक
शुक्रवार को पूर्व मंत्रियों की याचिका खारिज करने के दौरान उच्च न्यायालय ने अगले चार सप्ताहों के लिए आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने का भी आदेश दिया। यह कथित भ्रष्टाचार का मामला वर्ष 2008 से जुड़ा है। उस दौरान परसोत्तम सोलंकी मत्स्य पालन राज्य मंत्री थे और दिलीप संघानी गुजरात के कृषि मंत्री थे। इस दौरान पालनपुर के उद्यमी इशाक मराडिया ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने पसोत्तम सोलंकी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने निविदा प्रक्रिया का पालन किए बिना मछली पकड़ने के ठेके आवंटित कर नियमों का उल्लंघन किया।
दोनों पूर्व मंत्रियों पर क्या आरोप था?
मराडिया ने आरोप लगाया कि इस 400 करोड़ के घोटाले में सोलंकी भी शामिल थे। आरोप लगाया गया कि गुजरात के 58 जलाशयों में मत्स्य पालन के लिए अवैध रूप से ठेके दिए गए। इससे पहले की सुनवाइयों में सोलंकी ने अदालत में दावा किया था कि संघानी ने ये सभी ठेके दिए थे क्योंकि वे उस समय कैबिनेट मंत्री थे। राज्य सरकार द्वारा सोलंकी पर मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दिए जाने के बाद मराडिया ने वर्ष 2012 में उच्च न्यायालय का रुख किया था।
राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल के विरुद्ध निर्णय दिया था
हालांकि, 30 जुलाई, 2012 को गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य मंत्रिमंडल के विरुद्ध निर्णय दिया था। बेनीवाल ने सोलंकी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन को स्वीकृति दी थी। इसके बाद मराडिया ने भ्रष्टाचार रोधी अदालत का रुख किया। उन्होंने सोलंकी और संघानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई से संबंधित याचिका दाखिल की। सोलंकी और संघानी के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद विशेष अदालत ने मई 2013 में भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो को आरोपों की जांच करने के आदेश दिए थे। इसके अलावा अदालत ने एजेंसी को इस बारे में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा। वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने अदालत में अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि म्त्स्य पालन से जुड़े ठेके देने में अनियमितताएं बरतीं गईं। इसके बाद दोनों ही पूर्व मंत्रियों ने उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय में भी दोनों ही पूर्व मंत्रियों की याचिका को खारिज किया था।