कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतापगढ़ी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और धारा 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिकूल आरोप, दावे) के तहत केस दर्ज किया गया था।
गुजरात के जामनगर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह की पृष्ठभूमि में भड़काऊ गीत के साथ संपादित वीडियो पोस्ट करने पर कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर रद्द नहीं होगी। गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्रतापगढ़ी की ओर से इस संबंध में दायर याचिका खारिज कर दी। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि एफआईआर गुजरात पुलिस ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से दर्ज की है। न्यायमूर्ति संदीप भट्ट ने याचिका खारिज कर दी। एफआईआर में कहा गया है कि इस गीत के बोल भड़काऊ, राष्ट्रीय एकता को नुकसान और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले हैं।
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न्यायमूर्ति भट्ट ने अपने आदेश में कहा, जांच अभी शुरुआती चरण में है, मुझे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 या संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने का कोई कारण नहीं दिखता है। यह याचिका खारिज की जाती है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतापगढ़ी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और धारा 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिकूल आरोप, दावे) के तहत केस दर्ज किया गया था।
प्रतापगढ़ी की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई 46 सेकंड की वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि जब वह हाथ हिलाते हुए चल रहे थे तो उन पर फूलों की वर्षा की जा रही थी। उसकी पृष्ठभूमि में एक गाना बज रहा था। एफआईआर के अनुसार, इस गीत के बोल भड़काऊ हैं। अपनी याचिका में कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पृष्ठभूमि में चल रहा गीत प्रेम और अहिंसा का संदेश देता है। यह एफआईआर उन्हें परेशान करने के लिए दर्ज की गई है।