गुजरात के एक मछुआरे की कराची जेल में 16 जनवरी को मौत हो गई। एक कार्यकर्ता ने बताया कि 2022 में पाकिस्तानी एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा अनजाने में पार करने के बाद पकड़ लिया था। उसने लगभग तीन साल पहले ही अपनी सजा पूरी कर ली थी।
यह भी पढ़ें -Nitin Nabin Photos: मंदिर-गुरुद्वारे में प्रार्थना, फिर PM के हाथों से मिठाई, दिग्गजों की मौजूदगी में ताजपोशी
सजा खत्म के बाद भी जेल में बंद था मछुआरा
पोरबंदर बोट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जीवन जुंगी ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि मृतक संभवत गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना का रहने वाला था। पिछले कई महीनों से बीमार था। देसाई ने बताया, “जिस मछुआरे का निधन हुआ, उसे 2022 में पकड़ा गया था और उसकी राष्ट्रीयता सत्यापित होने के बाद उसी वर्ष उसकी सजा समाप्त हो गई थी। दोनों देशों के बीच 2008 के कांसुलर एक्सेस समझौते के बावजूद, सजा पूरी होने और राष्ट्रीयता सत्यापित होने के बाद भी मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में सड़ रहे हैं।”
समझौते की धारा 5 में यह प्रावधान है कि दोनों सरकारें राष्ट्रीयता की पुष्टि और सजा पूरी होने के एक महीने के भीतर व्यक्तियों को रिहा कर देंगी। उन्हें उनके स्वदेश वापस भेज देंगी। पिछले साल 22 दिसंबर को, दीव में मछुआरा समुदाय के सदस्यों और उनके दोस्तों ने विदेश मंत्री जयशंकर को एक पत्र सौंपकर इस मुद्दे की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकांश मछुआरे गुजरात, दीव और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं, जिनमें से 160 ने राष्ट्रीयता सत्यापन के बाद अपनी सजा पूरी कर ली है।
यह भी पढ़ें -Congress on BJP Chief Election: भाजपा के अध्यक्ष चुनाव पर कांग्रेस का तंज, कहा- ये चुनाव है या बिग बॉस के खेल?