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Kalavad Assembly Seat: मेघजीभाई ने यहां आठवीं बार खिलाया कमल, जानें कालावड सीट का चुनावी इतिहास

Sun, 01 Jan 2023 03:24 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

Gujarat Election 2022: कालावड विधानसभा सीट पर भाजपा के मेघजीभाई अमरभाई चावड़ा ने आप के डॉ. जिग्नेश सोलंकी को 15,850 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 59,292 वोट जबकि आप को यहां 44,360 वोट मिले। तीसरे नंबर कांग्रेस रही।
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गुजरात चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर आ गई। मतलब कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, इस बार सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए। एक सीट पर सपा उम्मीदवार विजयी हुए तो बाकी तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।
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जामनगर जिले की कालावड विधानसभा सीट पर भाजपा के मेघजीभाई अमरभाई चावड़ा ने आप के डॉ. जिग्नेश सोलंकी को 15,850 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 59,292 वोट जबकि आप को यहां 44,360 वोट मिले। तीसरे नंबर कांग्रेस रही। इसके प्रत्याशी प्रवीण नरसीभाई मुसडिया को 24,337 वोट मिले जो कुल वोट का महज 18.56 फीसदी रहा। बसपा व निर्दलीय उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई। वहीं, नोटा को 2,127 वोट मिले। 

2017 में कांग्रेस को मिली थी जीत 
सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने प्रवीण नरसीभाई मुसडिया ने भाजपा के मूलजीभाई दयाभाई घैयाड़ा को 32 हजार वोटों से हराया था। यहां कुल नौ उम्मीदवार मैदान में थे। इन दोनों के अलावा बाकी सात उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी।
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भाजपा ने पांच साल बाद फिर की वापसी
2012 के परिसीमन के बाद यह सीट अनुसूचित जाति के सुरक्षित हो गई। तब से हुए तीन चुनावों में यह भाजपा की कालावड सीट पर दूसरी जीत है। भाजपा को इस सीट पर 2012 एवं 2022 के चुनावों में जीत हासिल हुई है। हालांकि, 2017 के चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। अबकी बार वापसी करते हुए भाजपा ने फिर जीत दर्ज की है। 
नए परिसीमन से पहले यह सामान्य सीट थी। तब 1985 से लगातार छह बार 1985, 1990, 1995, 1998, 2002 और 2007 में यहां भाजपा का कमल खिला था। यानी, यहां हुए एक उपचुनाव समेत कुल 15 चुनाव में से आठ बार यह सीट भाजपा के कब्जे में रही है। चार बार यहां कांग्रेस उम्मीदवार जीतने में सफल रहे है। जबकि, तीन बार यहां निर्दलीय उम्मीदवारों को सफलता मिली है। 
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