प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब मतदान होने तक गुजरात में कई बार आमने सामने होंगे। इसकी शुरुआत बुधवार को होगी, जब पीएम मोदी सोमनाथ और इसके आसपास के इलाकों में रैलियां करेंगे तो राहुल सोमनाथ मंदिर में मत्था टेकने के बाद चुनाव प्रचार पर निकलेंगे।
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दोनों नेता प्रथम चरण के मतदान से पहले कई चरणों में चुनाव प्रचार करेंगे। इस दौरान पीएम के निशाने पर जहां पूरी कांग्रेस होगी, वहीं राहुल के निशाने पर सिर्फ पीएम होंगे।प्रथम चरण के चुनाव से पहले भाजपा की योजना पीएम की दो दर्जन से अधिक जनसभा कराने, चुनिंदा शहरों में रोड शो कराने की है।
कांग्रेस भी भाजपा की तर्ज पर राहुल को गुजरात में लगातार व्यस्त रखने की रणनीति बनाई है। बड़ी रैलियों के बदले राहुल की छोटे इलाकों में रैली और शहरों में रोड शो कराने की है। पार्टी ने विशेष रणनीति के तहत इस बार अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे उठाने के बदले नरम हिंदुत्व पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि विकल्प के अभाव में अल्पसंख्यक मतदाता न सिर्फ अपना समर्थन देंगे, बल्कि इनका मत प्रतिशत भी बढ़ेगा।कांग्रेस के रणनीतिकारों के मुताबिक भाजपा ने पीएम मोदी को आगे कर चुनाव में अपना अंतिम दांव चल दिया है। अब पार्टी की कोशिश पीएम की छवि को विकास और चुनावी वादों के संदर्भ में कमजोर करने की है।
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इसके तहत राहुल अपनी जनसभाओं में वर्ष 2014 में पीएम द्वारा किए गए वादे, बेरोजगारी, किसानों की बेहाली जैसे मु्द्दे उठाएंगे। इस दौरान राहुल बार बार भाजपा के विकास के उस गुजरात मॉडल पर निशाना साधेंगे, जिसकी भाजपा की ओर से इस बार कोई चर्चा नहीं हो रही।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि राज्य में हर बिरादरी का युवा वर्ग राज्य सरकार और भाजपा से बेहद खफा है। यही कारण है कि राहुल अपने भाषणों में खुद को लगातार युवाओं से संबद्घ करने की कोशिश कर रहे हैं।