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Gujarat Election: अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक सुनी जाएगी गुजरात चुनावों की धमक, विश्लेषकों की अलग-अलग राय

सार

Gujarat Election: मोदी और अमित शाह की जोड़ी गुजरात चुनाव परिणामों के इन दूरगामी परिणामों को बहुत अच्छे ढंग से समझती है। यदि मोदी को गुजरात चुनावों में बड़ी जीत हासिल होती है तो इससे पीएम नरेंद्र मोदी की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी...
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Gujarat Election: PM Modi - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान होने के बाद हिमाचल प्रदेश में भाजपा की वापसी होगी या नहीं, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों में कुछ मतभेद हैं, लेकिन ज्यादातर लोग गुजरात में इस बार भी भाजपा का ही पलड़ा भारी मान रहे हैं। इसके बाद भी भाजपा राज्य में जबरदस्त पसीना बहा रही है। पीएम मोदी पिछले तीन महीने के बीच दर्जनों बार राज्य की यात्रा कर विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण कर रहे हैं और नई योजनाओं की आधारशिला रख रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह भी राज्य में लगातार सक्रिय हैं और प्रदेश भाजपा नेताओं से ब्लॉक स्तर की रिपोर्ट ले रहे हैं। प्रश्न यह है कि यदि भाजपा के लिए गुजरात में सब कुछ इतना ही आसान है तो उसके नेता इतनी कड़ी मेहनत क्यों कर रहे हैं?

मजबूत नेता की छवि के लिए चाहिए बड़ी जीत

पीएम नरेंद्र मोदी 2014 से ही स्वयं को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत नेता के रूप में प्रोजेक्ट करने में जुटे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि तब मजबूत होनी शुरू हुई, जब उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी को अपनी छवि के दम पर बड़ी जीत दिलाई। 2019 के लोकसभा चुनाव, इसके पूर्व पुलवामा घटना के बाद पाकिस्तानी इलाके में भारतीय फ़ौज के द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक और इसी तरह की कुछ अन्य घटनाओं ने उनकी इस छवि को और ज्यादा मजबूत करने का काम किया।

आर्थिक स्तर पर भी देश के सामने कई चुनौतियां आईं। कोरोना काल के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था में आई मंदी, रूस-युक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुए प्रभाव के बीच भी सरकार न केवल अहम मोर्चे पर सफल साबित हुई, बल्कि इसके बाद भी देश की जीडीपी में 7.0 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है। पीएम अभी भी देश को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना दिखा रहे हैं। उनके ये दावे तभी ठोस माने जाएंगे जब भाजपा बड़ी जीत दर्ज करे। गुजरात में कमजोर जीत से इन दावों की मजबूती पर सवाल उठने लगेंगे जो पीएम मोदी कभी नहीं चाहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये ट्रेंड

राजनीतिक जानकार संजय पांडे के मुताबिक जब भी कोई नेता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने को मजबूती से स्थापित करना चाहता है, तो सबसे पहले वह घरेलू स्तर पर मजबूत करता है। इससे नेता अपने हर फैसले में अपनी जनता को अपने साथ होने का दिखावा करने का अवसर मिलता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसी तरह की कोशिश कर स्वयं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर चुके हैं। पीएम मोदी की गुजरात में बड़ी जीत हासिल करने की कोशिश को भी इस ट्रेंड से जोड़कर देखा जा सकता है।

विपक्ष की मजबूत होने की कोशिश

इन विधानसभा चुनावों के बीच ही राहुल गांधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकालकर स्वयं को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। दक्षिण में उनके अभियान को अच्छी सफलता मिलती भी दिखाई पड़ रही है। दक्षिण में भाजपा पहले भी बहुत मजबूत नहीं रही है, राहुल गांधी की यात्रा ने असर छोड़ा तो भाजपा को कर्नाटक में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इधर, उत्तर भारत में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी 2024 को लेकर ताल ठोंकते दिखाई पड़ रहे हैं। आरजेडी की मदद से यूपी सहित अन्य राज्यों में भी मोदी की घेरेबंदी की कोशिशें शुरू हो गई हैं। इन कोशिशों में विपक्ष को कितनी सफलता मिलेगी, यह कहना मुश्किल है, लेकिन भाजपा को उत्तर से लेकर दक्षिण तक में सीटों का कुछ नुकसान होने की संभावना जरूर बन सकती है। इसी परिस्थिति में यदि भाजपा गुजरात में भी कमजोर प्रदर्शन करे तो विपक्ष को संजीवनी मिल जाएगी।

मोदी और अमित शाह की जोड़ी गुजरात चुनाव परिणामों के इन दूरगामी परिणामों को बहुत अच्छे ढंग से समझती है। यदि मोदी को गुजरात चुनावों में बड़ी जीत हासिल होती है तो इससे पीएम नरेंद्र मोदी की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। घरेलू स्तर पर भी इन चुनावों की धमक अगले वर्ष आने वाले नौ राज्यों के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों पर भी दिखाई पड़ेगी। लिहाजा भाजपा इसमें बड़ी जीत हासिल करने के लिए पुरजोर कोशिश करती दिखाई पड़ रही है।

 

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