गुजरात चुनाव के नजदीक आते ही प्रदेश की राजनीति में उठापटक देखने को मिल रही हैं। सत्ताधारी भाजपा ने अपना गढ़ बचाने के लिए पार्टी के कई नेताओं के टिकट काट दिए हैं। जबकि पूर्व सीएम और डिप्टी सीएम समेत कई नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व का संकेत मिलते ही खुद से चुनाव लड़ने से इंकार दिया। हालांकि इसमें से कुछ नेता अंदर ही अंदर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर चुके थे। लेकिन जब दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ गुजरात के नेताओं के बैठकें हुईं, तो इसके बाद इन नेताओं ने अपने सुर बदल लिए और प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल को पत्र लिखकर चुनाव लड़ने की अनिच्छा जाहिर कर दी।
गुजरात चुनाव का कामकाज देख रहे भाजपा के एक वरिष्ठ सांसद ने नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला से चर्चा करते हुए कहा, प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेता एक साथ सामने से विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का एलान करें, इस पर थोड़ा आश्चर्य जरूर होता है। एकमात्र पूर्व सीएम विजय रूपाणी चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। उन्होंने अपनी इच्छा बहुत ही पहले ही केंद्रीय नेतृत्व को बता दी थी। जबकि दूसरे सभी नेता इस बार भी चुनाव मैदान में उतरने के मूड में थे। कुछ तो अंदर ही अंदर चुनावी तैयारियों में भी जुट गए थे।
हालांकि इन सभी नेताओं को अंदेशा था कि सरकार से निकालने के बाद पार्टी अब इन्हें विधानसभा चुनाव के टिकट से भी वंचित कर सकती है। इसके बाद भी इन सभी नेताओं ने बंद मुठ्ठी लाख की समझकर कोई भावना जाहिर नहीं की। लेकिन जब दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह के साथ गुजरात नेताओं के बैठकों के दौर चलने लगे। इसके बाद इन्हें समझ आ गया कि टिकट कट सकता है। केंद्रीय नेतृत्व से संकेत मिलते ही इन नेताओं ने अपने सुर बदल लिए। इसके बाद एक के बाद प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल को पत्र लिखकर चुनाव लड़ने की अनिच्छा जताई।
पार्टी देगी उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी
चुनाव से पहले राज्य के पूर्व सीएम विजय रूपाणी और पूर्व डिप्टी सीएम नितिन पटेल समेत कई नेताओं ने चुनाव नहीं लड़ने का एलान किया। रूपाणी सरकार के कुल 8 मंत्रियों ने चुनाव नहीं लड़ने का एलान किया है। इसमें भूपेंद्र सिंह चुडासमा, प्रदीप सिंह जाडेजा, सौरभ पटेल, भावनगर से विधायक विभावरी बेन दवे, कौशिक पटेल, आरसी फलदू, वल्लभ काकडिया और योगेश पटेल शामिल है। इन नेताओं ने अपने पत्र में बताया कि पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। छोटे से कार्यकर्ता के रूप में करियर की शुरुआत की थी और पार्टी ने उन्हें उच्च पद तक पहुंचाया। इसके लिए पार्टी के आभारी हैं। पत्र के पहले अधिकांश नेता अलग-अलग रूप से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके थे। अब इन सभी नेताओं को पार्टी विभिन्न क्षेत्रों या सीटों की जिम्मेदारी सौंपेगी, जहां उम्मीदवार को जिताने का काम करना होगा।
जाति फैक्टर के कारण लिस्ट जारी करने में देरी हुई
इधर, भाजपा ने गुरुवार सुबह गुजरात चुनाव के मद्देनजर अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर की। पार्टी ने 160 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं। पार्टी ने 69 विधायकों को फिर से मौका दिया। इनमें 14 महिला, 13 अनुसूचित जाति, 24 अनुसूचित जनजाति के लोगों को उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा को प्रत्याशी चयन में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। भाजपा के सामने जातीय समीकरण को साधकर उम्मीदवार खड़ा करना बड़ी चुनौती थी। इस चुनाव में बड़े और छोटे 18 समुदायों ने भाजपा से टिकट की मांग की थी। पाटीदार समुदाय ने 50 लोगों को टिकट देने को कहा था। वहीं प्रजापति 10, कोली 72, ठाकोर 8, जैन 10-15, क्षत्रिय 25, अहीर 12, ब्राह्मण 10, इसके अलावा बंजारा, माली, भोई, राणा, खारवा, मेर, वाघेर जैसी अन्य छोटी जातियों ने भी अलग सीटों की मांग की है।