गुजरात विधानसभा चुनाव की जंग बेशक देश के दो प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के बीच है। मगर खोडलधाम के चेयरमैन नरेश पटेल और पिछडों के मसीहा बनकर उभरे अल्पेश ठाकुर सूबे के दो सामाजिक चेहरे चुनाव परिणाम की धुरी बन गए हैं। दोनों ही दल इन चेहरों को अपने पाले में करने के लिए हर दांव चल रहे हैं। लेकिन दोनों ही चेहरों ने खुले तौर पर अभी किसी दल के साथ जाने के संकेत नहीं दिए हैं। इसलिए गुजरात विधानसभा का चुनाव रोचक बन गया है।
माना जा रहा है कि जिस किसी एक दल के पक्ष में ये दोनों चेहरे साथ खड़े हो गए तो विधानसभा चुनाव में उसकी जीत तय है। बताया जा रहा है कि इन चेहरों को साधने की कवायद में परदे के पीछे से मोलभाव का सियासी खेल जारी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सियासी दल नरेश और अल्पेश पर डोरे डाल रही हैं।
राहुल के बाद नरेश पटेल से मिले रूपानी
गुजरात चुनाव की धुरी बन चुके नरेश पटेल को साधने की कवायद में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीते दिनों संपन्न प्रदेश की चुनावी यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात की थी। कांग्रेस का प्रयास है कि नरेश पटेल गुजरात चुनाव में उनके उम्मीदवारों के पक्ष में प्रदेश की जनता के सामने अपील जारी कर दें।
मगर राहुल की नरेश पटेल से मुलाकात के चंद दिन बाद ही प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने पटेल से मुलाकात कर कांग्रेस के अरमानों पर ग्रहण लगा दिया है। अब खुद नरेश पटेल असमंजस में हैं। नरेश की सौराष्ट्र के पटेल समुदाय पर अच्छी पकड़ मानी जा रही है। तो दूसरी ओर अल्पेश को साधने के लिए भाजपा आलाकमान ने सूबे के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को मोर्चे पर लगा रखा है।
पीएम मोदी के खास अधिकारी रहे कैलाश नाथन भी अल्पेश पर जोर आजमाइश कर चुके हैं। लेकिन अभी तक उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई है। उल्टे अल्पेश ने दिल्ली आकर कांग्रेस महासचिव अहमद पटेल से मुलाकात भाजपा रणनीतिकारों को चौंका दिया है।
सूत्र बताते हैं कि तीन दिन पहले दिल्ली पहुंचकर अल्पेश ने अहमद पटेल से मुलाकात कर उनसे विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की है। बावजूद उसके अल्पेश ने कांग्रेस के साथ जाने का सार्वजनिक ऐलान अभी नहीं किया है। जबकि सूबे के विभिन्न आंदोलन से निकले हार्दिक पटेल और जिगनेश मवानी जैसे चेहरों ने भाजपा विरोध की नीति को आगे कर अपने मंसूबे पहले ही स्पष्ट कर दिए हैं।
हार्दिक पटेल गुजरात में पटेल आरक्षण की मांग को लेकर हुए आंदोलन से चमके हैं। तो जिगनेश मवानी उना में दलितों के विरुद्ध हुई घटना के बाद से दलित मसीहा बनकर उभरे हैं। मवानी और जिगनेश ने गुजरात में भाजपा को हराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया हुआ है। लेकिन नरेश पटेल और अल्पेश ठाकुर ने अपने पत्ते खोले बिना दोनों ही दलों के साथ अपने लिए भविष्य के अवसर खोले रखे हैं।