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Gujarat Election 2022: इन 'तीन मॉडल' के बीच फंसा गुजरात का चुनाव! किसके हाथ लगेगी बाजी?

सार

Gujarat Election 2022: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुजरात की जनसभाओं में डबल इंजन सरकार के बारे में कहते हैं कि अब यहां पर नए इंजन की आवश्यकता है। वह कहते हैं दो दशक पुराना इंजन खराब हो चुका है, इसलिए नए इंजन को मौका दो, यानी आम आदमी पार्टी को मौका दो...
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Gujarat Election 2022- Arvind Kejriwal, PM Narendra Modi, Asaduddin Owaisi - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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गुजरात में होने वाले चुनावों में इस बार 'तीन मॉडल' की परीक्षा होनी है। पहले नंबर पर गुजरात का वह मॉडल है, जिसके दम पर भारतीय जनता पार्टी ने पूरे देश में चुनाव लड़ा है। दूसरा आम आदमी पार्टी का दिल्ली मॉडल है। जबकि तीसरा ओवैसी का हैदराबाद मॉडल है। इन तीनों मॉडलों के माध्यम से गुजरात के चुनाव की गणित साधी जा रही है। गुजरात में सियासी जानकार बताते हैं कि तीनों मॉडलों की अलग-अलग इलाकों में न सिर्फ जबरदस्त पैठ है, बल्कि चुनाव की दशा और दिशा भी तय करने के लिहाज से ये पार्टियां मजबूती से चुनावी मैदान में डटी हैं।

गुजरात मॉडल की परीक्षा

बीते कुछ महीनों में प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की गुजरात में हुई लगातार रैलियों, जनसभाओं और कार्यक्रमों में इस बात का जिक्र किया गया कि बीते दो दशक में गुजरात किस तरीके से एक रोल मॉडल के तौर पर डेवलपमेंट की नई कहानी कहता चला आ रहा है। गुजरात के इसी डेवलपमेंट मॉडल को लेकर भाजपा ने बीते कुछ सालों से देश के अलग-अलग राज्यों में चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं होना लाजमी हैं कि गुजरात के चुनाव में क्या गुजरात मॉडल अपनी वही गाथा दोबारा दोहराएगा या नहीं। गुजरात के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक दयाल वाधवानी कहते हैं कि जिस मॉडल के आधार पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पूरे देश में सरकार बना रहे हैं निश्चित तौर पर उसी राज्य में उस मॉडल की इस बार परीक्षा तो होगी ही। बाधवानी कहते हैं कि चुनाव में हर पार्टी अपने मॉडल, एजेंडे और अपने मेनिफेस्टो का जिक्र करती है। क्योंकि इस बार गुजरात में दो नई पार्टियां भी चुनावी मैदान में हैं, तो उनके मॉडल को भी जनता परखेगी। इसमें एक मॉडल केजरीवाल का दिल्ली मॉडल है, जबकि हैदराबाद के असदुद्दीन ओवैसी का भी अपना मेनिफेस्टो तैयार होकर जनता के बीच पहुंच चुका है।

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुजरात की जनसभाओं में डबल इंजन सरकार के बारे में कहते हैं कि अब यहां पर नए इंजन की आवश्यकता है। वह कहते हैं दो दशक पुराना इंजन खराब हो चुका है, इसलिए नए इंजन को मौका दो, यानी आम आदमी पार्टी को मौका दो। गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार चंदन पटेल कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल ऐसा कहकर आम आदमी पार्टी के दिल्ली मॉडल को आगे बढ़ा रहे हैं। पटेल कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं को एक हजार रुपये देने का वादा किया है। इसके अलावा दिल्ली में दी जाने वाली उन सभी सुविधाओं का भी जिक्र करके वह गुजरात में दिल्ली मॉडल को आगे बढ़ा रहे हैं। चंदन का कहना है कि पंजाब में हुए हालिया विधानसभा के चुनावों की जीत से लबरेज आम आदमी पार्टी न सिर्फ दिल्ली के अलावा पंजाब में बनी सरकार का भी जिक्र करके गुजरात में वोटरों के बीच पहुंच रही है।

ओवैसी को भा रहा गुजरात

भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के अलावा गुजरात के चुनाव में इस बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी हैदराबाद मॉडल के साथ चुनाव में उतरी है। सियासी जानकारों का कहना है कि गुजरात में जातिगत समीकरणों के आधार पर असदुद्दीन ओवैसी को गुजरात की जमीन बहुत उर्वरा नजर आ रही है। यही वजह है कि ओवैसी गुजरात में अपनी रैलियों के दौरान लोगों के सुख-दुख में शामिल होने वाला इमोशनल कार्ड खेलना नहीं भूलते हैं। हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी का यही मॉडल हिट भी है। वरिष्ठ पत्रकार एसएन ओहरी कहते हैं कि गुजरात की गलियों में असदुद्दीन ओवैसी जब जनता से मुखातिब होते हैं, तो वह खुद को बेटा और भाई बता कर उनके दुख-दर्द को बांटने की बात करते हैं। उनका कहना है कि जातिगत समीकरणों के आधार पर असदुद्दीन ओवैसी के ऐसे भाषण मुस्लिम समुदाय में उनकी पैठ को मजबूत करते हैं। अहमदाबाद में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के कुछ पार्षद भी हैं। ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन की गुजरात राज्य कार्यकारिणी के सदस्य और वरिष्ठ नेता सैयद समसुद्दीन कहते हैं कि विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में मुसलमानों की आवाज उठाने वाला अगर कोई व्यक्ति है तो वह ओवैसी ही हैं। समसुद्दीन कहते हैं कि हैदराबाद में जिस तरीके से वह गरीबों की आवाज बुलंद कर रहे हैं और हैदराबाद में उसी तर्ज पर हमारे पार्षद बने हैं, तो निश्चित तौर पर गुजरात में होने वाले चुनावों में हमारी पार्टी बहुत अच्छा करने वाली है। वह कहते हैं कि हम अपने हैदराबाद के मॉडल पर गुजरात में चुनाव लड़ रहे हैं।

गुजरात में हो रहे चुनावों में भाजपा, आम आदमी पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन के मॉडलों के बीच में चर्चा कांग्रेस की भी खूब हो रही है। राजनीतिक विश्लेषक चंदन पटेल कहते हैं कि कांग्रेस की चर्चा किसी मॉडल की वजह से नहीं बल्कि इस बात से हो रही है कि उसके अपने वोट बैंक का बंटवारा आखिर किन पार्टियों के बीच हो रहा है। वह कहते हैं कि सभी पार्टियों का रुख आक्रामक है, लेकिन कांग्रेस का गुजरात में फिलहाल कोई भी आक्रामक रुख नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस के वोट बैंक को ओवैसी और आम आदमी पार्टी अपने अपने मॉडलों के माध्यम से अपनी ओर खींच रही है। हालांकि कांग्रेस से जुड़े नेताओं का कहना है कि गुजरात में उनकी पार्टी बहुत मजबूती से चुनाव लड़ रही है।

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