अहमदाबाद जिले की साणंद सीट अपने आप में खास रहती है। ये सीट गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है जिसके सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं। पिछले कुछ चुनावों में यहां भाजपा व कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा है। इस चुनाव से पहले हुए दो चुनावों में एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी। 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई थी।
इस चुनाव में भाजपा ने यहां कनुभाई पटेल को टिकट दिया था। कनुभाई ने कांग्रेस के रमेश पटेल को 35,369 वोटों से हरा दिया।
2017 चुनाव में भाजपा ने दर्ज की थी जीत
2017 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर सत्ताधारी भाजपा को जीत हासिल हुई थी। भाजपा उम्मीदवार कनुभाई पटेल ने कांग्रेस की पुष्पाबेन डाभी को सात हजार वोटों से हराया था। इस चुनाव में कुल 14 उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें से 11 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
यहां भाजपा कांग्रेस में रही है कांटे की टक्कर
2017 के चुनाव में भले ही यहां भाजपा ने जीत हासिल की थी लेकिन 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। तब कांग्रेस करमसीभाई पटेल जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। उन्होंने भाजपा के कामाभाई राठौड़ को चार हजार से ज्यादा मतों से हराया था।
इस सीट के राजनीतिक महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कनुभाई पटेल के नामांकन में खुद अमित शाह पहुंचे थे। 2022 चुनाव के लिए भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक कनुभाई करमशीभाई पटेल को ही टिकट दिया था। वहीं, कांग्रेस ने इस सीट पर रमेश पटेल को मैदान में उतारा था। आम आदमी पार्टी की ओर से कुलदीपसिंह दिलीपसिंह वाघेला मैदान में थे। इस सीट पर पांच दिसंबर को दूसरे चरण में मतदान हुआ था। नतीजे आठ दिसंबर को आए।
2017 में अहमदाबाद जिले की 15 सीटों पर जीती थी भाजपा
साणंद सीट अहमदाबाद जिले में आती है। इस जिले में कुल 21 सीटें हैं। 2017 में जिले की 21 में से 15 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, छह सीटों पर कांग्रेस जीत दर्ज करने में सफल रही थी।
इस बार क्या रहे गुजरात के चुनाव नतीजे?
इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर आ गई। मतलब कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, इस बार सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए। एक सीट पर सपा उम्मीदवार विजयी हुए तो बाकी तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।