पोरबंदर जिले में आने वाली पोरबंदर विधानसभा सीट इस चुनाव में सबसे चर्चित सीटों में एक थी। ये सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पोरबंदर महात्मा गांधी का गृह नगर है। इस सीट से भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक बाबूभाई बोखिरिया को उम्मीदवार बनाया था। बोखिरिया 2012 में भी इस सीट से जीते थे।
पिछली बार भाजपा को जीत दिलाने वाले बाबूभाई बोखिरिया इस बार अपनी सीट हार गये। बोखिरिया को उनके चिर प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार अर्जुन मोढवाडिया ने 8,181 वोटों से हराया। इससे पहले लगातार दो बार बोखिरिया यहां से जीते थे।
2017 में कम वोटों से ही जीत पाए थे भाजपा के मौजूदा विधायक
2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा ने जीत दर्ज की। भाजपा ने बाबूभाई बोखिरिया ने अपने चिर प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार अर्जुन मोढवाडिया को महज 1,855 वोटों से हराया था। इस चुनाव में कुल 11 उम्मीदवार मैदान में थे। कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवारों के अलावा बाकी नौ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
2012 में भी बाबूभाई बोखिरिया ने कांग्रेस के अर्जुन मोढवाडिया को 17 हजार वोट से हराया था। उस चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को छोड़कर बाकी 6 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
इसके पहले 2007 और 2002 में कांग्रेस के अर्जुन मोढवाडिया यहां से जीते थे। पिछले कई सालों से यहां भाजपा व कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं बाबूभाई बोखिरिया व अर्जुन मोढवाडिया के बीच ही मुकाबला रहा है। वहीं, 1995 और 1998 में यहां से भाजपा के मौजूदा विधायक बाबूभाई बोखिरिया ने जीत दर्ज की थी।
इस बार भी अर्जुन मोढवाडिया और बाबूभाई बोखिरिया में ही थी टक्कर
पिछले कई चुनावों की तरह इस बार भी इस सीट से दोनों चिरप्रतिद्वंदी आमने-सामने थे। भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक बाबूभाई बोखिरिया को मैदान में उतारा था। वहीं, कांग्रेस की ओर से अर्जुन मोढवाडिया फिर से मैदान में थे। इस सीट पर एक दिसंबर को पहले चरण में मतदान हुआ था। नतीजे आठ दिसंबर को आए।
2017 में पोरबंदर जिले से ही जीता था एनसीपी का एकलौता विधायक
पोरबंदर सीट, पोरबंदर जिले की दो सीटों में से एक है। पोरबंर जिले की एक अन्य सीट कुटियाना है। 2017 में कुटियाना से शरद पवार की पार्टी एनसीपी को जीत मिली थी। यहां से कंधाल जडेजा जीते थे। हालांकि, इस बार टिकट नहीं मिलने से नाराज जडेजा ने एनसीपी से इस्तीफा दे दिया था। जडेजा समाजवादी पार्टी से मैदान में उतरे थे और चुनाव में जीत दर्ज की।