गुजरात चुनाव की गहमा-गहमी के बीच तीन नए नवेले नेता मीडिया के ही नहीं राजनीतिक पार्टियों के भी आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। इन नेताओं में सबसे प्रमुख हैं हार्दिक पटेल। पाटीदार समुदाय से आने के कारण ऐसा माना जा रहा था कि हार्दिक जिस पार्टी को सपोर्ट करेंगे समुदाय उसी पार्टी को वोट देगा।
हार्दिक पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के अध्यक्ष हैं और पाटीदार समुदाय के लिए नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग के साथ 2015 में सड़कों पर उतरे और पाटीदार युवाओं की आवाज बने। गुजरात चुनावों के दौरान राज्य के साथ साथ देश के बाकी हिस्सों के तमाम नेताओं की निगाहें भी हार्दिक पटेल पर टिकी रही थीं।
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शायद यही वजह है कि 24 साल के इस पाटीदार युवक ने महज दो महीनों में वो कर दिखाया जो कांग्रेस ही नहीं गुजरात के कई नेता दशकों से नहीं कर पाए। रातों-रात नेशनल मीडिया में छा जाने वाले हार्दिक चुनावी मैदान में भले न उतरे हों लेकिन वो एक पक्के नेता जरूर हैं। तभी वो कभी आप पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के साथ नजर आते हैं तो कभी एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल से जोड़-तोड़ की बात करते दिखाई देते हैं, तो कभी वो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ बैठक कर रहे होते हैं।