गुजरात में पहले चरण के लिए 89 सीटों पर होने वाला प्रचार समाप्ति की ओर है। 9 दिसंबर को भाजपा के गढ़ वाली इन सीटों पर मतदान होना है। एक तरफ जहां भाजपा की मतदान को लेकर धड़कन बढ़ रही है, वहीं कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग का भी इसमें इम्तिहान है।
पहले चरण का मतदान पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी, अल्पेश ठाकोर के लिए भी अहम है। कांग्रेस के रणनीतिकार भी इसे अपनी सोशल इंजीनरिंग के लिए अग्निपरीक्षा के तौर पर देख रहे हैं।
पहले चरण में कच्छ, सौराष्ट्र और दक्षिणी गुजरात के कुछ हिस्से में मतदान है। इस क्षेत्र में पाटीदारों का दबदबा रहता है। 2012 और 2014 के लोकसभा चुनाव तक पाटीदार भाजपा के साथ थे। पाटीदार गुजरात में वर्चस्व रखने वाला समुदाय है। यह भाजपा के पक्ष में न केवल आक्रामक प्रचार करता था, बल्कि बूथ प्रबंधन और मतदान में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता था। लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में इसमें साफ दरार दिखाई दे रही है।
18 से लेकर 40 साल तक में भाजपा के प्रति खास गुस्सा देखा जा रहा है वहीं 40 से अधिक के आयु वर्ग में नाराजगी है, लेकिन स्थिति थोड़ी अलग है। इसी चरण में सूरत जिले में भी मतदान हैं। यहां 16 सीटें है, और सबसे ज्यादा पाटीदार प्रभावित हैं। उधना, कमरेज, वराछा रोड, कटरगाम, ओलपाड़ में पाटीदार सीधे तौर पर प्रत्याशी की किस्मत तय कर देते हैं।
ऐसे में इन सीटों पर चुनाव जहां राज्य में मृत पड़ी कांग्रेस को संजीवनी दे सकती है वहीं हार्दिक पटेल का भविष्य तय करने का माद्दा रखता है। इसका जितना कांग्रेस समेत अन्य को फायदा होगा, उतना ही भाजपा के लिए ये खतरे की घंटी है। क्योंकि पिछली बार सूरत की एक छोड़कर बाकी सभी सीटें भाजपा के खाते में गई थी।
कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों के अनुसार पहले चरण का मतदान गुजरात विधानसभा चुनाव की पूरी पटकथा लिख देगा, इसलिए कांग्रेस कोई भी अवसर गंवाना नहीं चाहती। दरअसल इस क्षेत्र की कुल 89 सीटों में से पिछले विधानसभा चुनाव में 63 पर अकेले भाजपा का कब्जा था। पार्टी के रणनीतिकार और आईटी सेल से जुड़े रोहन गुप्ता के अनुसार इस बार 89 में से कांग्रेस को करीब 50 सीटें मिल सकती हैं।