चुनाव के दौरान प्रवासियों को लुभाने के लिए राजनीतिक दल हमेशा से नए-नए हथकंडे अपनाते रहे हैं। नेता वोटर को लुभाने के लिए उस प्रदेश में जाकर उनकी भाषा में बोलने से लेकर उनके पहनावे तक को तो अपनाते रहे हैं लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी एक नई स्ट्रैट्जी के साथ मैदान में उतरी थी जिसे इसबार गुजरात चुनाव में कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है।
गुजरात में पिछले 22 साल से बीजेपी ने कब्जा बनाया हुआ है। इसबार कांग्रेस ने बीजेपी की तर्ज पर गुजरात में रह रहे हिंदी भाषियों के पीछे उन प्रदेशों के जाने माने चेहरों और नेताओं को लगाया गया है।
सूरत गुजरात की व्यवसायिक नगरी हैं और यहां बड़ी संख्या में बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रवासी बसे हुए हैं । कांग्रेस इस बार अपने खोए राज्य को हासिल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है इसलिए पार्टी के उपाध्यक्ष लगातार गुजरात में बने हुए हैं।
पढ़ें: गुजरात चुनाव में क्या हार्दिक पटेल बन पाएंगे किंग मेकर, किसके लिए होंगे फायदेमंद
तीन दिनों से गुजरात में जगह जगह रैली कर रहे राहुल बाबा कभी सेल्फी लेते तो कभी बच्चे से रास्ता पूछते नजर आ रहे हैं और आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं युवा वोटरों को लुभाने में जी-जान लगाकर मेहनत कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के स्ट्रैटेजिस्ट इस चुनाव में भाजपा के दांव-पेच खेलकर उन्हें हराने की कोशिश में लगे नजर आ रहे हैं।