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गुजरात चुनाव: बीजेपी के नक्शेकदम पर चलकर उसी को मात देने में जुटी कांग्रेस

Sat, 04 Nov 2017 06:58 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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राहुल गांधी - फोटो : ANI
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चुनाव के दौरान  प्रवासियों को लुभाने के लिए राजनीतिक दल  हमेशा से नए-नए हथकंडे अपनाते रहे हैं। नेता वोटर को लुभाने के लिए उस प्रदेश में जाकर उनकी भाषा में बोलने से लेकर उनके पहनावे तक को तो अपनाते रहे हैं लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी एक नई स्ट्रैट्जी के साथ मैदान में उतरी थी जिसे इसबार गुजरात चुनाव में  कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है।
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गुजरात में पिछले 22 साल से बीजेपी ने कब्जा बनाया हुआ है। इसबार कांग्रेस ने बीजेपी की तर्ज पर गुजरात में रह रहे हिंदी भाषियों के पीछे उन प्रदेशों के जाने माने चेहरों और नेताओं को लगाया गया है।
 
सूरत गुजरात की व्यवसायिक नगरी हैं और यहां बड़ी  संख्या  में बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रवासी बसे हुए हैं । कांग्रेस इस बार अपने खोए राज्य को हासिल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है इसलिए पार्टी के उपाध्यक्ष लगातार गुजरात में बने हुए हैं।
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पढ़ें:  गुजरात चुनाव में क्या हार्दिक पटेल बन पाएंगे किंग मेकर, किसके लिए होंगे फायदेमंद

तीन दिनों से गुजरात में जगह जगह रैली कर रहे राहुल बाबा कभी सेल्फी लेते तो कभी बच्चे से रास्ता पूछते नजर आ रहे हैं और आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं युवा वोटरों को लुभाने में जी-जान लगाकर मेहनत कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के स्ट्रैटेजिस्ट इस चुनाव में भाजपा के दांव-पेच खेलकर उन्हें हराने की कोशिश में लगे नजर आ रहे हैं। 
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राहुल गांधी - फोटो : amar ujala
गुजरात चुनाव के कांग्रेस के प्रभारी एक ओर जहां राजस्थानियों पर नजर रखे हुए हैं वहीं यूपी के नेता अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भैया भी वहां जमकर अपने लोगों के बीच पहुंच रहे हैं।  खुद राहुल गांधी गुजरात के युवा चेहरों को अपने साथ शामिल कर एक बड़े वोटबैंक पर कब्जा करने में जी-जान से लगे हुए हैं।

शुक्रवार को  दलित नेता जिग्नेश मेवाणी से मुलाकात के बाद  राहुल ने कहा, ‘हमने सबको सुना और उनकी समस्याओं पर काम किया। चाहे वह जिग्नेश हो, पाटीदार अमानत आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल हों या फिर ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर।’ 

ऐसा माना जा रहा है कि दलितों और ओबीसी का चेहरा बने हार्दिक और जिग्नेश कांग्रेस के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित होंगे। वोटरों को चारों तरफ से घेरने और उन्हें नोटबंदी और जीएसटी के नुकसान बताने के साथ इस बार कांग्रेस कोई भी कोर कसर छोड़ने के मूड में बिल्कुल नजर नहीं आ रही है।

यही वजह है कि एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और महिला मोर्चा से जुड़े प्रतिनिधि शहर में घर-घर पहुंच रहे हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार कांग्रेस ने करीब 10 से अधिक टीम अपने अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वहां बसे प्रवासियों को कांग्रेस को वोट देने के लिए प्रेरित करने में जुटे हैं।   
 
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