गुजरात की एक अदालत ने शनिवार को मेहसाणा जिले में तालुका विकास अधिकारी, पूर्व सरपंच और दो अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इन सभी पर एक व्यक्ति के घर के शौचालय और बाथरूम को गैरकानूनी तरीके से ध्वस्त करने का आरोप है।
आरोपियों ने ब्राह्मणवाड़ा गांव में यह दावा करते हुए शौचालय और बाथरूम को तुड़वा दिए थे कि शिकायतकर्ता बाबूभाई चौधरी ने यह निर्माण पंचायत की जमीन पर किया था। चाणस्मा में न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) उमरखान पठान ने पाया कि इन चार व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार हैं। इसके बाद उन्होंने आपराधिक जांच की अनुमति दी।
बाबूलाल चौधरी ने निर्माण को अवैध तरीके से ध्वस्त करने के लिए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था और कहा था कि इससे उन्हें वित्तीय नुकसान हुआ है। उन्होंने पर सत्ता के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया था। निर्माण को बिना नोटिस के फरवरी 2023 में ध्वस्त किया गया था। इससे संबंधित मामला गुजरात उच्च न्यायालय में लंबित था।
अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत एक औपचारिक कार्रवाई की अनुमति दी और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत एक लोकसेवक द्वारा शक्ति के दुरुपयोग, आपराधिक अतिक्रमण और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के संबंध में मामला दर्ज करने का आदेश दिया। सीआरपीसी की धारा 2024 के तहत एक मजिस्ट्रेट समन या वारंट जारी कर सकता है।
अदालत ने गवाहों की गवाही और दस्तावेजी सबूतों को ध्यान में रखा और ब्राह्मणवाड़ा गांव के पूर्व सरपंच, तलाटी, सर्कल सर्वेक्षण अधिकारी और तत्कालीन तालुका विकास अधिकारी के खइलाफ आदेश जारी किया। कोर्ट ने देखा कि आरोपियों ने यह जानते हुए भी अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर गैरकानूनी तरीके से विध्वंस किया कि मामला उच्च न्यायालय में लंबित था। शिकायतकर्ता का ब्राह्मणवाड़ा ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने एक पुराना घर था, जिसे तुड़वाकर उन्होंने शौचालय और बाथरूम के साथ एक नया छोटा सा घर बनाया था।
गुजरात की अदालत ने एक व्यक्ति के शौचालय और बाथरूम को अवैध तरीके से तोड़ने के आरोप में पूर्व सरपंच और तीन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।