गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने 'ट्विटर टाउन हॉल' के जरिए शुक्रवार को लोगों से संवाद का प्रयास किया। भारत में यह पहली बार था जब किसी राजनेता ने ट्विटर टाउनहाल करके लोगों से सीधे जुड़ने का प्रयास किया। इस टाउन हॉल में ट्विटर से सीधे विजय रूपानी से सवाल पूछने के लिए #askvijayrupani हैशटैग का पिछले कुछ दिनों से जोरशोर से प्रचार प्रसार किया जा रहा था। लेकिन, विजय रुपानी का यह प्लान बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ।
विजय रुपानी के ट्विटर टाउनहाल कार्यक्रम को सपल बनाने का जिम्मा एक स्थानीय टीवी चैनल को दिया गया था। इसके लिए गुजरात के सभी प्रमुख शहरों में होर्डिंग बैनर लगाने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर खूब जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया गया था। विजय रुपानी ने लोगों से राज्य सरकार से संबंधित पूछे गए सभी सवालों के जवाब देने का वादा किया किया। विजय रुपानी को उम्मीद थी कि इससे उनकी सरकार की छवि सुधरेगी।
सवाल पूछने के लिए शुक्रवार को सुबह 10:30 से 12:30 तक का समय निर्धारित किया गया था। इस समय अतंराल में हजारों लोगों ने विभिन्न मुद्दों पर विजय रुपानी से सवाल पूछे। लोग अपने मुख्यमंत्री से जवाब की उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन, विजय रुपानी के ट्विटर हैंडल से एक भी सवाल का जवाब नहीं आया। दो घंटे बाद सवाल दागने वालों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने ट्विटर पर #gujcmmissing ट्रेंड कराना शुरू कर दिया।
जब रुपानी ने कार्यक्रम सफल बनाने के लिए लोगों को दिया धन्यवाद
विजय रुपानी
शुक्रवार सुबह होते ही लोगों ने सामूहिक तौर पर सवाल दागने शुरू कर दिए। पर मुख्यमंत्री रुपानी के ट्विटर हैंडल से एक भी सवालों के जवाब नहीं दिए गए। कुल 8000 पूछे गए सवालों में से सीएम रुपानी ने बाद में महज 5 सवालों के जवाब दिए। फिर अचानक दोपहर 12.45 बजे सीएम रुपानी के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट हुआ, जिसमें लिखा था कि ट्विटर टाउन हॉल बड़ा सफल रहा। ऐसे संवाद से लोकशाही को मजबूती मिलेगी। सभी प्रतिभागियों का शुक्रिया। सब हैरान थे कि उनके एक भी सवाल का जवाब नहीं आया, इसके बावजूद सीएम ने कैसे इसे सफल कार्यक्रम बता दिया?
Twitter Town Hall was a phenomenal success. Such interactions strengthen democracy. I thank all the participants.
— Vijay Rupani (@vijayrupanibjp) September 23, 2016
सीएम के इस विफल प्रयास पर लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया और सोशल साइट पर #GujaratCMMissing ट्रोल करा दिया। इस मामले पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने सफाई देते हुए बताया कि तकनीकी खामियों, जैसे कि ट्विटर, मीडिया पार्टनर्स और मुख्यमंत्री के कार्यालय के साथ ठीक ढंग से समन्यव ना होने की वजह से यह प्रयोग इस तरह से असफल हुआ। उन्होंने बताया कि देश-विदेश से आए 35 हजार से भी ज्यादा ट्वीट्स का व्यक्तिगत रूप से जवाब देना संभव ही नहीं है।
बता दें कि ट्वीट के जरिए पूछे गए सवालों में पाटीदार आंदोलन में सरकार की भूमिका से लेकर,पाटीदार और दलित आंदोलन के बाद की राजनीतिक स्थिति,मुख्यमंत्री पद पर बदलाव के बाद की चुनौतियां, पार्टी के बीच की कलह, फिक्स्ड वेतन, आम आदमी पार्टी के बढ़ते प्रभुत्व जैसे कई धारदार सवाल थे, पर चिंता का विषय सरकार के लिए युवाओं के रोजगार का मुद्दा सबसे ज्यादा रहा। ऐसे राज्य के युवा जहां लोगों की नस-नस में बिजनेस दौड़ता है।