जीएसटी और नोटबंदी की मार से परेशान व्यापारियों के खिलाफ होने की चर्चाओं के बीच भाजपा को उनसे पुराने रिश्तों पर भरोसा है। पार्टी के चुनाव रणनीति की अगुवाई कर रहे पार्टी के शीर्ष नेता का कहना है कि गुजरात के व्यापारियों से हमारे पुराने रिश्ते हैं। भाजपा से उन्हें कोई अलग नहीं कर सकता है। हालांकि उक्त नेता ने स्वीकार किया कि जीएसटी के वजह से व्यापारियों वर्ग के बीच व्यवहारिकता को लेकर कुछ शिकायतें थीं। जिसे जीएसटी काउंसिल ने टैक्स दर और नियमों में बदलाव कर सुधार किया है।
पार्टी के इस शीर्ष नेता ने दावा किया कि हाल ही में हुए जीएसटी नियमों के बदलाव में गुजरात के 84 प्रतिशत व्यापारियों की समस्या का समाधान हुआ है। शेष 16 प्रतिशत में वैसे व्यापारी हैं, जिनका बुनियादी ढांचा बहुत मजबूत है। उनपर जीएसटी का कुछ असर नहीं। पार्टी नेता ने कहा कि व्यापारियों से रिश्ते अटूट हैं, थोड़ी बहुत नाराजगी है लेकिन कोई अलग नहीं जाएगा।
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भाजपा का आंकलन अल्पेश, हार्दिक और जिग्रेश की चाल में
विभिन्न जातिगत आंदोलन के जरिए गुजरात की त्रिमूर्ति के रूप में चेहरा बनकर उभरे अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल और जिग्रेश मवानी को लेकर भाजपा का आंकलन है कि कांग्रेस पार्टी इस चाल में खुद बुरी फंसेगी। शीर्ष भाजपा नेता ने गुजरात का गणित बताते हुए कहा कि हार्दिक, अल्पेश और जिग्रेश जिसे त्रिमूर्ति कहा जा रहा है। इन तीनों में आपसी एका नहीं है। तीनों के समर्थक और मांगों में जबरदस्त द्वंद है।
हार्दिक जहां पटेलों के लिए पिछड़ा वर्ग में आरक्षण मांग रहे हैं। तो अल्पेश की राजनीति पिछड़ों को मिले आरक्षण का बचाव और पटेलों के विरोध पर उभरी है। यदि कांग्रेस पार्टी हार्दिक को साधने के लिए पटेलों को आरक्षण का वायदा करती है तो न सिर्फ अल्पेश समर्थक नाराज होंगे। बल्कि पिछड़े वर्ग में कांग्रेस पार्टी का विरोध बढ़ेगा। और यदि कांग्रेस पार्टी हार्दिक को पटेल आरक्षण पर ठोस आश्वासन नहीं देगी तो पटेलों को उसे साथ नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति कमोबेश जिग्रेश को भी लेकर है। वे कांग्रेस से कठोर मोलभाव करेंगे। जिसका खामियाजा भी कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। भाजपा का मानना है कि त्रिमूर्ति का दांव कांग्रेस को उल्टा पड़ेगा।