गुजरात के प्रभारी अशोक गहलोत बड़े बारीक नेता हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव के बारे में पूछने पर झीनी सी मुस्कान के साथ कहते हैं कि पार्टी वहां विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाएगी। अशोक गहलोत के इस दावे पर भरत सिंह सोलंकी को मुहर लगाते देर लगती। लेकिन इसका राज गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से बतौर कोआर्डिनेटर सक्रिय सूत्र ने बताया। वरिष्ठ नेता का कहना है कि पिछले ढाई दशक में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब गुजरात के व्यापारी, उद्योगों से जुड़े लोग कांग्रेस पार्टी के नेताओं का खुलकर सहयोग कर रहे हैं।
बताते हैं बड़ोदरा, अहमदाबाद, सूरत, समेत पूरे गुजरात में यह ट्रेंड है। यहां तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले दक्षिणी गुजरात में भी यही स्थिति है। सूत्र का कहना है कि 2007 और 2012 के चुनाव में स्थिति इसके बिल्कुल उलट थी। विधानसभा चुनाव के नजदीक आने पर व्यापारी, व्यवसायी, उद्योगों से जुड़े लोग शगुन के नाम पर एक नाम मात्र लिफाफा पार्टी नेताओं की तरफ बढ़ा देते थे। लेकिन इस बार लोग अपना सहयोग देने के लिए खुलकर सामने आ रहे हैं।
पढ़ें- गुजरात चुनाव की गहमागहमी के बीच 29 अक्टूबर को कर्नाटक चुनाव का बिगुल फूकेंगे पीएम मोदी
सूरत के प्रताप सिंह का भी कहना है कि राज्य में कांग्रेस को लोगों की सोच बदल रही है। बड़ोदरा के हरेश मलानी का अच्छा कारोबार है। हरेश मलानी का कहना है कि राहुल गांधी जनसभा अब खुद ही सबकुछ बोल रही है। शहर से लेकर गांव तक कांग्रेस नेताओं के अनुसार उन्हें यह जनसमर्थन केवल सांबर कांठा, बनास कांठा, सौराष्ट्र में नहीं मिल रहा है, बल्कि अहमदाबाद, सूरत, बड़ोदरा के शहरी क्षेत्रों में भी मिल रहा है। पार्टी के गुरुद्वारा रकाबगंज स्थित कार्यालय में लगातार सक्रिय रहे सूत्र के अनुसार 2012 के चुनाव में कांग्रेस को ग्रामीण क्षेत्र से काफी सीटें मिली थी। वोट प्रतिशत भी भाजपा से अधिक था।
पार्टी 42.9 प्रतिशत वोट पाने में सफल रही थी। लेकिन शहरी गुजरात में कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था। शहरी गुजरात में भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी थी। उसे करीब 60 प्रतिशत वोट मिले थे। रणनीतिकारों को अनुमान है कि जिस तरह से पटेल उनके साथ जुड़ रहे हैं, उससे इस बार शहरी क्षेत्र में अच्छा वोट मिलने की उम्मीद है। अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवानी के पार्टी जुड़ने के बाद ग्रामीण गुजरात में भी वोट प्रतिशत बढ़ने का पूरा अनुमान है। सूत्र का कहना है कि गुजरात में करीब 20 प्रतिशत पटेल हैं। 1995 से पटेल लगातार बहुतायत में भाजपा का साथ देते रहे हैं। लेकिन इस बार तस्वीर बदने की प्रबल संभावना है।