गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन से जुड़े मामले में नया मोड़ आया है। अहमदाबाद की एक अदालत ने मंगलवार को भाजपा विधायक हार्दिक पटेल के खिलाफ 2018 के दंगा और अशांत गतिविधियों से जुड़े केस में आरोप तय कर दिए। हार्दिक पटेल वही नेता हैं, जिन्होंने पाटीदार आंदोलन को सड़कों से राजनीतिक मुख्यधारा तक पहुंचाया था। अदालत के इस फैसले के बाद इस बहुचर्चित मामले में उनके खिलाफ औपचारिक ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
यह मामला अगस्त 2018 में अहमदाबाद शहर के निकोल थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। एफआईआर में हार्दिक पटेल और अन्य आंदोलनकारियों पर दंगा करने, गैरकानूनी भीड़ बनाने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, आपराधिक साजिश रचने और पुलिस के काम में बाधा डालने जैसी धाराएं लगाई गई थीं। यह कार्रवाई उस समय की गई थी जब पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) ने निकोल इलाके में बिना अनुमति के प्रतीकात्मक उपवास रखा था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जी.बी. सियाग ने मंगलवार को औपचारिक रूप से आरोप तय किए, जिनके दौरान विधायक हार्दिक पटेल अदालत में मौजूद रहे।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
पाटीदार आरक्षण आंदोलन 2015 में शुरू हुआ था, जब PAAS ने सरकारी नौकरियों और शिक्षा में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग तेज कर दी थी। आंदोलन के दौरान कई शहरों में झड़पें और पुलिस कार्रवाई भी हुई। इसी अवधि में हार्दिक पटेल एक प्रखर युवा नेता के रूप में उभरे और उन्होंने आंदोलन का चेहरा बनकर राज्य की राजनीति को झकझोरा। 2015 से 2019 के बीच उन पर कई एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें निकोल वाला मामला एक महत्वपूर्ण केस माना जाता है।
कानूनी प्रक्रिया और पिछली कार्यवाही
इस केस में हार्दिक पटेल कई बार अदालत में पेश नहीं हुए थे, जिसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। हालांकि बाद में गुजरात हाई कोर्ट ने इस वारंट को रद्द कर दिया। हार्दिक पटेल ने मामले में डिस्चार्ज (मुक्ति) की अर्जी भी लगाई हुई है, जो फिलहाल हाई कोर्ट में लंबित है। लेकिन ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब मामला औपचारिक सुनवाई की ओर बढ़ चुका है।
हार्दिक पटेल का राजनीतिक सफर
आंदोलन से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले हार्दिक पटेल ने बाद में कांग्रेस जॉइन की, जहां उन्हें राज्य नेतृत्व में भी भूमिका दी गई। हालांकि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें विरमगाम सीट से टिकट दिया और वे विधायक चुने गए। पाटीदार आंदोलन के दौर से गुजरकर विधानसभा तक पहुंचने वाले हार्दिक अब इस केस में अदालत के सामने अपना पक्ष साबित करने की तैयारी कर रहे हैं।