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‘जजों के परिवारों के टेलीफोन व कंप्यूटर पर भी पहरा’

Fri, 04 Jan 2019 03:42 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह 10 सरकारी एजेंसियों को किसी भी कंप्यूटर को इंटरसेप्ट व निगरानी करने के लिए अधिकृत करने के केंद्र की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा ने बृहस्पतिवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। 
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शर्मा ने कहा कि उन्हें बुधवार को यह जानकारी भी मिली है कि जजों के परिवार के लोगों के टेलीफोन और कंप्यूटरों पर निगरानी रखी जा रही है। उल्लेखनीय है कि वकील शर्मा पर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने फालतू जनहित याचिका दायर करने पर जुर्माना लगाया था। पीठ ने वकील शर्मा से पूछा कि क्या आपने जुर्माने की राशि जमा कर दी है। जवाब हां में मिलने पर पीठ ने कहा कि वह उनकी याचिका पर आवश्यकतानुसार सुनवाई करेगी। 

शर्मा ने याचिका में सरकारी अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि इस अधिसूचना के आधार पर इन एजेंसियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत जांच व आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से रोका जाए। 
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टीएमसी ने की निगरानी आदेश वापस लेने की मांग

गृह मंत्रालय द्वारा दस एजेंसियों को किसी भी कंप्यूटर की जांच करने संबंधी आदेश पर राज्यसभा में टीएमसी के सांसदों ने आशंका जताई कि इस कदम से भारत ‘पुलिस राज्य’ में तब्दील हो जाएगा। सांसदों ने इस आदेश को वापस लेने की मांग की।

शून्य काल में सुखेंदु शेखर रे ने कहा कि सौ साल पहले ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों की नागरिक आजादी छीनने के लिए लागू किए गए रॉलेट एक्ट का विरोध किया गया था। सौ साल बाद हमने देखा है कि सरकार ब्रिटिश सरकार के नक्शेकदम पर चल रही है।
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