साल में 20 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारी वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली (जीएसटी) के दायरे में नहीं आएंगे। हालांकि पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी राज्यों के लिए यह सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है। इसका फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाले जीएसटी परिषद की पहली बैठक में लिया गया। जीएसटी प्रणाली में दर क्या होगी, इसका फैसला अगले महीने होगा।
डेढ़ करोड़ रुपये तक कारोबार करने वालों पर राज्य का नियंत्रण
जेटली ने शुक्रवार को यहां परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों को छोड़, देशभर में 20 लाख रुपये से ज्यादा का सालाना कारोबार करने वाले व्यापारी जीएसटी के दायरे में आएंगे। पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी राज्यों में यह सीमा 10 लाख रुपये है। यह भी तय हुआ कि साल में 20 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों पर राज्य सरकार का नियंत्रण होगा जबकि डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार करने वालों को केंद्र और राज्य सरकार, दोनों क्रॉस एक्जामिनेशन कर सकेंगे। हालांकि जेटली ने कहा कि डुअल कंट्रोल जैसी स्थिति से बचने के लिए इन असेसी को या तो केंद्रीय एजेंसी देखेगी या राज्य एजेंसी। सेवा कर के सभी वर्तमान असेसी केंद्र सरकार के पास ही रहेंगे। उन्होंने बताया कि अच्छी बात यह रही कि ये फैसले सर्वसम्मति से हुए, वोटिंग कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
भरपाई के लिए आधार वर्ष 2015-16
उन्होंने बताया कि राज्यों को राजस्व में घाटा होने की स्थिति में भरपाई के लिए 2015-16 को आधार वर्ष बनाने पर सहमति बनी है। राज्यों को क्षतिपूर्ति की राशि का भुगतान हर तिमाही होगा।
काउंसिल की अगली बैठक 30 सितंबर को
अरुण जेटली ने यह भी बताया कि काउंसिल की अगली बैठक 30 सितम्बर को होगी। उस बैठक में नियमों के मसौदे के साथ-साथ जीएसटी से छूट पाने वाली वस्तु एवं सेवाओं पर भी चर्चा होगी। इसके बाद आगामी 17, 18 और 19 अक्तूबर को परिषद की अगली बैठक होगी, जिसमें जीएसटी की दरें तय की जाएंगी।