केंद्र सरकार ने सोमवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) काउंसिल पांच फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाली वस्तुओं को आठ फीसदी के स्लैब में लाने की तैयारी कर रही है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
सूत्रों ने बताया कि काउंसिल के पास इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह खबर केवल अनुमानों पर आधारित है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
अगले महीने होनी है जीएसटी काउंसिल की बैठक
जीएसटी काउंसिल की बैठक अगले महीने होनी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इस बैठक में काउंसिल उस प्रस्ताव पर विचार कर सकती है जिसमें पांच फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाली वस्तुओं के तीन और आठ फीसदी के स्लैब में लाने की बात कही गई है।
रविवार को सामने आई रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रस्ताव के अनुसार बड़े स्तर पर उपभोग वाली कुछ वस्तुओं को तीन फीसदी के कर स्लैब में रखा जाएगा और बाकी बची वस्तुओं को आठ फीसदी स्लैब के तहत कर दिया जाएगा।
वर्तमान में, जीएसटी में चार टैक्स स्लैब (पांच, 12, 18 और 28 फीसदी हैं। इसके अलावा सोना और सोने के आभूषणों पर तीन फीसदी कर लगता है। काउंसिल में केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं।
पांच फीसदी स्लैब में एक फीसदी के इजाफे का परिणाम
पांच फीसदी स्लैब में अगर एक फीसदी का इजाफा किया जाता है तो इसमें लगभग 50,000 करोड़ रुपये का सालाना अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इस स्लैब में मुख्य रूप से पैक खाद्य सामग्रियां हैं। जीएसटी के तहत, आवश्यक वस्तुओं पर कर की दर या तो सबसे कम रखी जाती है या फिर उन्हें कर में छूट दी जाती है। जबकि, लग्जरी वस्तुओं पर सबसे अधिक कर (28 फीसदी) लगाया जाता है और यह राशि राज्यों को जीएसटी लागू होने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी जाती है।
जून में समाप्त होने वाली है क्षतिपूर्ति अनुदान व्यवस्था
जीएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान की व्यवस्था इस साल जून में समाप्त होने वाली है। ऐसे में यह जरूरी है कि राज्य आत्मनिर्भर बनें और जीएसटी कलेक्शन में राजस्व के अंतर को पाटने के लिए केंद्र पर निर्भर न रहें। काउंसिल ने पिछले साल राज्य मंत्रियों के लिए एक समिति का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को दी गई थी। इस समिति को कर दरों को युक्तिसंगत बनाकर और कर ढांचे में विसंगतियों को दूर करके राजस्व बढ़ाने के उपाय सुझाने का जिम्मा दिया गया था।
एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू करते समय केंद्र सरकार ने जून 2022 तक राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान देने पर सहमति जताई थी।