लंबी मशक्कत के बाद सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में जीएसटी विधेयक पेश करने की तैयारी पूरी कर ली है। राज्यसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस जीएसटी विधेयक पर होने वाली चर्चा में कुछ मुद्दों पर आपत्ति के साथ समर्थन देगी।
सरकार के साथ बनी सहमति के बाद इस विधेयक को कल ही देर शाम चर्चा के बाद पारित करा दिया जाएगा। मंगलवार को विधेयक में कैबिनेट की तरफ से किए गए संशोधनों की प्रति सांसदों को बांट दी गई।
हालांकि, कई सांसदों ने राज्यसभा के उपसभापति से शिकायत की कि उन्हें विधेयक की प्रति नहीं मिली है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि विधेयक में किए गए संशोधन की प्रति राज्यसभा सचिवालय को दो दिन पहले दे दी गई थी।
इन संशोधनों के बाद ही विपक्ष ने सरकार को जीएसटी पर समर्थन का भरोसा दिया है। कांग्रेस ने बुधवार को अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने को कहा है। गौरतलब है कि यह विधेयक पिछले साल मई में लोकसभा में पारित हो चुका है।
राज्यसभा में बहुमत की कमी की वजह से यह विधेयक लंबे समय से अटका पड़ा है। लेकिन विधेयक में हुए बदलाव की वजह से राज्यसभा की हरी झंडी के बाद इसे एक बार फिर लोकसभा में पारित कराना होगा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मांग पर सरकार ने विधेयक में जरूरी बदलाव किए हैं।
इसके तहत निर्माण करने वाले राज्यों पर लगने वाले एक फीसदी अतिरिक्त कर को वापस लेने की मांग मान ली गई है। इसके अलावा जीएसटी लागू होने के बाद कर वसूली में जो भी घाटा होगा उसकी पांच साल तक शत प्रतिशत भरपाई केंद्र सरकार करेगी।
इन शर्तों को मानने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को मदद का भरोसा दिया है। जीएसटी के संशोधित प्रावधानों के तहत जीएसटी काउंसिल, केंद्र और राज्य या खुद राज्यों के बीच होने वाले विवादों के निपटारे की प्रणाली बनाएगा।