नौसेना को पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती जल्द मिल सकता है। रडार की पकड़ में नहीं आने वाले इस युद्धपोत से नौसेना की ताकत में इजाफा होगा। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एडमिरल वीके सक्सेना ने बताया, आईएनएस कवरत्ती उन चार पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों में से अंतिम है, जिनका निर्माण पी-28 परियोजना के तहत नौसेना के लिए किया जा रहा है।
सक्सेना ने बताया, इस युद्धपोत के सभी परीक्षण सफल रहे हैं और पूरे हो चुके हैं। हमारी इसे इस महीने के अंत तक नौसेना को सौंपने की योजना है। कवरत्ती जीआरएसई द्वारा निर्मित 104वां पोत होगा। 3300 टन वजनी इस पोत के 90 फीसदी पुर्जे स्वदेश निर्मित हैं और नई तकनीक की मदद से इसकी देखरेख की आवश्यकता भी कम होगी।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह युद्धपोत परमाणु, रासायनिक तथा जैविक युद्ध की स्थिति में भी काम करेगा। चार रडार रोधी और पनडुब्बी रोधी पोतों के नाम हैं, आईएनएस कमोर्ता, आईएनएस कदमत और आईएनएस किलतान।
ये नाम लक्षद्वीप द्वीपसमूह के द्वीपों के नाम पर रखे गए हैं। आईएनएस कमोर्ता को 2014 में नौसेना को सौंपा गया था। वहीं आईएनएस कदमत नवंबर, 2015 में और किलतान अक्तूबर, 2017 में नौसेना के सुपुर्द कर दिया गया था।