दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में छाई आर्थिक सुस्ती के माहौल में भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत भले ही ठीक हो, लेकिन मौजूदा हालात में दहाई अंकों में विकास दर हासिल पाना संभव नहीं है। यह स्वीकारोक्ति वित्त मंत्री अरुण जेटली की तरफ से बृहस्पतिवार को आई।
एक कार्यक्रम के दौरान जेटली ने कहा कि वास्तविकता के धरातल पर बात करें तो मौजूदा वैश्विक वातावरण में कोई भी देश दहाई अंक की विकास दर हासिल नहीं कर सकता। लेकिन इन परिस्थितियों में भी कम से कम ऊंचे विकास का लक्ष्य तो रख ही सकते हैं।
उनके मुताबिक इस हालत में भी विकास दर को मौजूदा स्तर से बढ़ाना जरूर संभव है। वित्त वर्ष 2016-17 के लिए 7.75 फीसदी विकास दर के सरकार के अनुमान के बारे में उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य देशों के तुलना में यह काफी बेहतर है।
वर्तमान वैश्विक हालात की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को छोड़ कर और कुछ भी भारत के पक्ष में नहीं है। वैश्विक मंदी के कारण देश का निर्यात लगातार घटता जा रहा है।
लेकिन तब भी घरेलू स्तर पर सेक्टरों में कृषि और भौगोलिक क्षेत्रों में पूर्वी भारत पर फोकस करने की जरूरत है क्योंकि इन दोनों में विकास की अपार संभावना है। इसके अलावा निजी क्षेत्र को और बेहतर करने तथा नीतिगत सुधारों की भी जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लगातार दो साल कमजोर मानसून के बाद इस साल मानसून सामान्य रहेगा। यदि मानसून सामान्य रहा तो फिर स्थिति में बदलाव होगा।