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कांधला: कुछ तो चले गए, कुछ जाने को तैयार

Wed, 15 Jun 2016 02:43 AM IST
नितिन यादव/ अमर उजाला, कांधला
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कांधला में बंद पड़ा गौरव जैन का मकान - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
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एक ओर सूची। नए नाम और नई सियासत। पहले कैराना और अब कांधला। पलायन शब्द को लेकर हो-हल्ला जारी है। सांसद का अपना दावा तो प्रशासन के अपने तर्क। कांधला की कहानियां कई हैं। अपराध से डटकर लड़ने की भी हैं और ऐसे घरों की भी, जिन पर ताले लटकते चले गए। हालात यह भी है कि जो लोग अभी भी रहे हैं, वे किसी सूची का हिस्सा नहीं हैं। अपनी सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन को शस्त्र लाइसेंस के लिए दिया गया आवेदन रद्दी में जा चुका है और सांसद जी की लिस्ट तो बस पलायन करने वालों की है।  
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खुद की थी सुरक्षा, घूमे थे बाजार में 
रेलवे रोड कांधला पर तरुण सैनी खाद और बीज के व्यापारी हैं। दुकान पर तीन-चार लोग और भी साथ बैठे हैं। बात शुरू करते ही उनका दर्द छलक उठता है, लेकिन साथ ही हौसला भी कम नहीं दिखाते हैं। तरुण का कहना है कि 27 नवंबर 2014 को एक-47 और दूसरे अत्याधुनिक हथियार लेकर उनकी दुकान पर कुछ युवक रंगदारी मांगने पहुंचे थे।

जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने कुछ नाम बताए और बस कुछ दिनों के लिए सुरक्षा दी। उन्होंने लाइसेंसधारी अपने रिश्तेदारों को बुलाया। चार लोग रोजाना दुकान पर हथियारों के साथ बैठते थे। तरुण यही नहीं रुके और बाजार में घूमकर व्यापारियों से कस्बा छोड़ने के बजाए अपराध का डटकर मुकाबला करने की अपील की। यह बात और है कि कई बार अर्जी लगाने के बावजूद तरुण आज भी शस्त्र लाइसेंस नहीं बनवा पाए हैं।
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( बंद पड़ा ओम प्रकाश का घर, फोटो अमर उजाला, शामली )
आधे दाम भी मिले तो छोड़ दें कस्बा 
रेलवे रोड पर ही व्यापारी सतीश जैन अपने दो बेटों के साथ दुकान पर बैठे हैं। उन्हें दो सितंबर 2014 को रंगदारी की चिट्ठी भेजी गई थी। इसके बाद फोन पर पैसे मांगे गए। न देने पर दुकान में लूट कर दी गई। रोजाना फोन पर धमकाया गया। तमाम डर के बावजूद वे अपने प्रतिष्ठान पर बैठे हैं।

चूंकि वे गए नहीं हैं तो उनका नाम पलायन करने वालों की सूची में नहीं है। उनके बेटे विक्की का कहना है कि इतना बड़ा व्यापार और प्रापर्टी सालों की मेहनत से खड़ा हुआ है। सालों से डर में जी रहे हैं। एक नामचीन अपराधी के जेल में जाने के बाद भी उसके नाम से फोन आया।

अब हालत यह है कि यदि आधे दाम पर भी उनकी प्रापर्टी बिक जाए तो वे जाने को तैयार हैं। पिछले दो साल में कई बार आवेदन देने के बावजूद उनका भी शस्त्र लाइसेंस आज तक नहीं बना है। कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। 

बेटों ने छोड़ दिया, अब मैं भी जाऊंगा 
मोहल्ला सरावज्ञान के लोहा व्यापारी सतेंद्र जैन के सात बेटे शहर छोड़कर जा चुके हैं। पीड़ा उनकी भी यही है कि कोई मदद नहीं मिली। किसी ने उनका दर्द नहीं सुना और अब जल्द ही व्यापार समेटकर वह भी जाने की तैयारी में हैं। 

चार दिन पहले ही मिली है धमकी 
जाट कॉलोनी में अपने फैशन हाउस चलाने वाले बृहस्पतिवार को राजेंद्र पंवार को चार दिनों पहले ही रंगदारी की धमकी मिली है। उनके अभी गनर उपलब्ध कराया गया है। राजेंद्र का कहना है कि पूरा परिवार दहशत में है और धमकी देने वालों को पुलिस अभी पकड़ नहीं पाई है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल स्टोर चलाने वाले अजित कुमार को भी शुक्रवार को धमकी मिली है। मामले को पुलिस ने आपसी मारपीट का बताकर छोड़ दिया है। 


( बंद पड़ी ओम प्रकाश की दुकान, फोटो अमर उजाला, शामली )
और लटकते चले गए ताले 
कांधला में भी रंगदारी और अपराध की जड़ों ने कई बड़े घरों की दीवारों को वीराना बना दिया। पुरानी नक्काशी और बेहतरीन तरीके से बनाई गई हवेलियों पर आज ताले पड़े हैं। कुछ में बस एकाध कमरों में कोई रह रहा है तो कुछ को तोड़ने की तैयारी चल रही है।

मोहल्ला सरावज्ञान के ओमप्रकाश जैन, सुभाष चंद्र जैन, श्रीयांश जैन, मनीष कुमार जैन आदि के नाम सांसद की सूची में हैं। ये सब अब कांधला छोड़ चुके हैं और वजह सिर्फ अपराध ही रहा। किसी से रंगदारी मांगी गई तो किसी के घर से सरेआम लूटपाट मचाई गई। लोहे के थोक व्यापारी रहे मोहल्ला शेखजादगान निवासी कमलदीप जैन ने भी रंगदारी के कारण अपना व्यापार और घर छोड़ दिया।

सरावज्ञान के संतलाल सहित ऐसे और भी कई नाम हैं, जिन्हें अब लोग किसी घटना और दूसरी बात से जोड़कर याद करते हैं। जिन लोगों के घर अभी नहीं बिके हैं तो वे पड़ोसियों को फोन करके लेने वालों के बारे में पूछताछ करते हैं। इंतजार है तो बस इस बात का कि सही कीमत न सही, लेकिन आधी भी मिल जाए तो पूरी तरह से कांधला से रिश्ता ही मिट जाए।

नफा नुकसान का गणित लगा रहे राजनीतिक दल

कांधला में मंदिर और मस्जिद की एक दीवार - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
यह मामला उठने के बाद सियासी दल अपना गुणा भाग लगाने में जुट गए हैं। मुद्दा भाजपा ने उठाया, तो सियासी हलकों में हलचल मच गई। हर राजनीतिक दल अपने हिसाब से पलायन की परिभाषा तय कर रहा है। भाजपा इसे भुनाने में जुट गई है, तो सपा, बसपा और रालोद इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं। पलायन प्रकरण से आखिर किसका फायदा होगा और किसका होगा नुकसान। राजनीतिक दल भी इसकी गुणा भाग करने में लगे हुए हैं।

खास बात यह है कि मुद्दा भले ही कैराना से शुरू हुआ, मगर अब कांधला भी पहुंच गया। भाजपा सांसद ने कांधला की सूची जारी कर नई बहस छेड़ दी, जिसके बाद सपा नेता इसकी खिलाफत में उतर आए और कहने लगे कि भाजपा सांसद वोटों की राजनीति में क्षेत्र का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। क्या वास्तव में पलायन प्रकरण आगामी विधानसभा चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण करने में कामयाब होगा। क्योंकि शामली जिले की व्यवस्था पर गौर करें, तो यहां चुनावी समीकरण एकदम अलग रहा है। जिले की कैराना, शामली और थानाभवन विधानसभा सीटों पर अलग ही समीकरण बनता है।

ऐसे में हर राजनीतिक दल अपने जनाधार को बनाए रखने के प्रयास में है, तो भाजपा हिंदुओं को लामबंद कर सकती है। सीटवार अलग समीकरण हैं, जिसमें सपा गुर्जर और मुसलिम गठजोड़ को बनाकर रखना चाहती है। लब्बो लुआब यही है कि पलायन प्रकरण पर हर राजनीतिक दल की नजर लगी हुई है। 

2011 की जनगणना का आंकड़ा 
स्थान -                        (हिंदू)     (मुस्लिम) 
कैराना तहसील -      2,66,061 - 3,10,366
शामली तहसील -   4,61,032  - 2,21,174 
कांधला नगर            16,320    -    71,863
नगर पंचायत ऊन - 13602 - 1449 
झिंझाना नगर -           7886 - 10707 
एलम नगर -                 9002 - 3068 
बनत नगर -                  13399 - 7187 
थानाभवन नगर -            16347 - 20213 
गढ़ीपुख्ता नगर-              4655- 7021 
जलालाबाद नगर-            6939 - 20835 

नई पीढ़ी ने बिगाड़ा सामाजिक ढांचा 
इंटर कॉलेज के प्रबंधक वीपी अग्रवाल कहते हैं कि कांधला में लोग आपसी भाईचारे से रहते आए। पुराने लोग आज भी एक दूसरे का सम्मान करते हैं, सुख दुख में शामिल होते हैं, मगर नई पीढ़ी ने सामाजिक संरचना को तोड़ दिया, पुरानी व्यवस्था खंडित हो गई। 
 थाने के सामने भी कर दिया हमला : सतेंद्र जैन 
कांधला के मोहल्ला सरावज्ञान निवासी सतेंद्र जैन कहते हैं कि कांधला के हालात बहुत खराब है। उनकी दुकान पर कुछ लोगों ने आकर दबंगई दिखाई। शिकायत करने थाने पहुंचे, तो थाने के बाहर ही मारपीट कर दी। ऐसी पुलिस पर कैसे भरोसा करें, जो अपने गेट पर भी सुरक्षा नहीं कर सकती। ( शामली से आनंद प्रकाश की रिपोर्ट )
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बाहर हैं, फिर भी कैराना का हाल जानने को बेकरार

कांधला में हुई दोनों समाज के लोगों की बैठक - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
भाजपा सांसद हुकुम सिंह के कस्बे से 346 हिंदू परिवारों के पलायन का मामला मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद बाहर शहरों में रहने वाले रिश्तेदार टीवी न्यूज सुनने के बाद अपने  कैराना के रिश्तेदारों का हाल जानने के लिए परेशान हैं। अन्य शहरों से धड़ाधड़ कैराना में फोन आ रहे है कि कैराना में क्या हुआ।

जोड़वा कुआं पर रेडीमेंट की दुकान करने वाले विनोद कुमार ने बताया कि टीवी पर रोज न्यूज आने के कारण दिल्ली सहारनपुर व अन्य शहरों में रहने वाले उनके रिश्तेदार रोज हमारा हाल जानने के लिए फोन करते है। वहीं इन हालातों के कारण व्यवसाय बहुत ही कम हो गया है।

मोहल्ला अफगानान निवासी तारिक रजा ने बताया कि रोजाना मोबाइल पर उनके रिश्तेदार यह पूछते है कि कैराना में कैसा बवाल हो गया। जिस पर हम जवाब देते देते थक गये कि यहां कुछ नहीं हुआ। सब जगह शांति है।

जोड़वा कुआं पर ही छोले भटूरों की दुकान करने वाले विकास शर्मा ने बताया कि यहां शांति पूवर्क सब रह रहे हैं। लेकिन दिल्ली, देहरादून व पानीपत में रहने वाले उनके रिश्तेदार यहा की खबरें सुनकर बहुत परेशान हैं। रोज दूसरे शहरों से फोन आ रहे हैं।

मोहल्ला नवाब अली ने बताया कि कैराना में अपनी भाईचारा व प्यार मोहब्बत आज भी कायम है। लेकिन इन हालात के कारण उनके रिश्तेदार परेशान है कि यहा क्या होगा।
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