एक ओर सूची। नए नाम और नई सियासत। पहले कैराना और अब कांधला। पलायन शब्द को लेकर हो-हल्ला जारी है। सांसद का अपना दावा तो प्रशासन के अपने तर्क। कांधला की कहानियां कई हैं। अपराध से डटकर लड़ने की भी हैं और ऐसे घरों की भी, जिन पर ताले लटकते चले गए। हालात यह भी है कि जो लोग अभी भी रहे हैं, वे किसी सूची का हिस्सा नहीं हैं। अपनी सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन को शस्त्र लाइसेंस के लिए दिया गया आवेदन रद्दी में जा चुका है और सांसद जी की लिस्ट तो बस पलायन करने वालों की है।
खुद की थी सुरक्षा, घूमे थे बाजार में
रेलवे रोड कांधला पर तरुण सैनी खाद और बीज के व्यापारी हैं। दुकान पर तीन-चार लोग और भी साथ बैठे हैं। बात शुरू करते ही उनका दर्द छलक उठता है, लेकिन साथ ही हौसला भी कम नहीं दिखाते हैं। तरुण का कहना है कि 27 नवंबर 2014 को एक-47 और दूसरे अत्याधुनिक हथियार लेकर उनकी दुकान पर कुछ युवक रंगदारी मांगने पहुंचे थे।
जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने कुछ नाम बताए और बस कुछ दिनों के लिए सुरक्षा दी। उन्होंने लाइसेंसधारी अपने रिश्तेदारों को बुलाया। चार लोग रोजाना दुकान पर हथियारों के साथ बैठते थे। तरुण यही नहीं रुके और बाजार में घूमकर व्यापारियों से कस्बा छोड़ने के बजाए अपराध का डटकर मुकाबला करने की अपील की। यह बात और है कि कई बार अर्जी लगाने के बावजूद तरुण आज भी शस्त्र लाइसेंस नहीं बनवा पाए हैं।
( बंद पड़ा ओम प्रकाश का घर, फोटो अमर उजाला, शामली )
आधे दाम भी मिले तो छोड़ दें कस्बा
रेलवे रोड पर ही व्यापारी सतीश जैन अपने दो बेटों के साथ दुकान पर बैठे हैं। उन्हें दो सितंबर 2014 को रंगदारी की चिट्ठी भेजी गई थी। इसके बाद फोन पर पैसे मांगे गए। न देने पर दुकान में लूट कर दी गई। रोजाना फोन पर धमकाया गया। तमाम डर के बावजूद वे अपने प्रतिष्ठान पर बैठे हैं।
चूंकि वे गए नहीं हैं तो उनका नाम पलायन करने वालों की सूची में नहीं है। उनके बेटे विक्की का कहना है कि इतना बड़ा व्यापार और प्रापर्टी सालों की मेहनत से खड़ा हुआ है। सालों से डर में जी रहे हैं। एक नामचीन अपराधी के जेल में जाने के बाद भी उसके नाम से फोन आया।
अब हालत यह है कि यदि आधे दाम पर भी उनकी प्रापर्टी बिक जाए तो वे जाने को तैयार हैं। पिछले दो साल में कई बार आवेदन देने के बावजूद उनका भी शस्त्र लाइसेंस आज तक नहीं बना है। कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं।
बेटों ने छोड़ दिया, अब मैं भी जाऊंगा
मोहल्ला सरावज्ञान के लोहा व्यापारी सतेंद्र जैन के सात बेटे शहर छोड़कर जा चुके हैं। पीड़ा उनकी भी यही है कि कोई मदद नहीं मिली। किसी ने उनका दर्द नहीं सुना और अब जल्द ही व्यापार समेटकर वह भी जाने की तैयारी में हैं।
चार दिन पहले ही मिली है धमकी
जाट कॉलोनी में अपने फैशन हाउस चलाने वाले बृहस्पतिवार को राजेंद्र पंवार को चार दिनों पहले ही रंगदारी की धमकी मिली है। उनके अभी गनर उपलब्ध कराया गया है। राजेंद्र का कहना है कि पूरा परिवार दहशत में है और धमकी देने वालों को पुलिस अभी पकड़ नहीं पाई है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल स्टोर चलाने वाले अजित कुमार को भी शुक्रवार को धमकी मिली है। मामले को पुलिस ने आपसी मारपीट का बताकर छोड़ दिया है।
( बंद पड़ी ओम प्रकाश की दुकान, फोटो अमर उजाला, शामली )
और लटकते चले गए ताले
कांधला में भी रंगदारी और अपराध की जड़ों ने कई बड़े घरों की दीवारों को वीराना बना दिया। पुरानी नक्काशी और बेहतरीन तरीके से बनाई गई हवेलियों पर आज ताले पड़े हैं। कुछ में बस एकाध कमरों में कोई रह रहा है तो कुछ को तोड़ने की तैयारी चल रही है।
मोहल्ला सरावज्ञान के ओमप्रकाश जैन, सुभाष चंद्र जैन, श्रीयांश जैन, मनीष कुमार जैन आदि के नाम सांसद की सूची में हैं। ये सब अब कांधला छोड़ चुके हैं और वजह सिर्फ अपराध ही रहा। किसी से रंगदारी मांगी गई तो किसी के घर से सरेआम लूटपाट मचाई गई। लोहे के थोक व्यापारी रहे मोहल्ला शेखजादगान निवासी कमलदीप जैन ने भी रंगदारी के कारण अपना व्यापार और घर छोड़ दिया।
सरावज्ञान के संतलाल सहित ऐसे और भी कई नाम हैं, जिन्हें अब लोग किसी घटना और दूसरी बात से जोड़कर याद करते हैं। जिन लोगों के घर अभी नहीं बिके हैं तो वे पड़ोसियों को फोन करके लेने वालों के बारे में पूछताछ करते हैं। इंतजार है तो बस इस बात का कि सही कीमत न सही, लेकिन आधी भी मिल जाए तो पूरी तरह से कांधला से रिश्ता ही मिट जाए।