इस जिले में कुपोषण के खिलाफ जंग में अशिक्षा, गरीबी, और कम उम्र में शादी बड़ी वजह है। लॉकडाउन के बाद से पुष्टाहार वितरण भी प्रभावित मिला। महिलाओं में गर्भधारण के वक्त और शिशुओं को क्या पोषक तत्व खिलाएं इसकी जानकारी का अभाव था।
इसके चलते संपन्न परिवार के भी महीने में एक-दो बच्चे एनआरसी में भर्ती होने के लिए आ जाते हैं। गांवों में लॉकडाउन के बाद से पुष्टाहार वितरण प्रभावित मिला। एक गांव में तो केंद्र ही बंद था। ग्रामीणों ने कभी-कभार ही पुष्टाहार मिलने की बात कही।