स्पष्ट रूप से राम फैक्टर रामनाथपुरम लोकसभा क्षेत्र में उतना प्रभावी नहीं। यूं कहें कि देश में सबसे ज्यादा मंदिरों वाले इस राज्य में धर्म कभी राजनीतिक-सामाजिक फैसलों का आधार नहीं रहा। रामलला की अभिभूत कर देने वाली मूर्ति कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने दक्षिण भारतीय शैली में बनाई, पर तमिलनाडु में इस पर कहीं व्यापक चर्चा नहीं दिखी। यहां सिर्फ तमिलवाद का सिक्का चलता है।
रामनाथपुरम लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो इसके तहत आने वाली रामेश्वरम विधानसभा और इसके आसपास मछुआरों का बड़ा वर्ग है, जो समुद्री जीव पकड़ने व उनकी प्रोसेसिंग के कारोबार से जुड़ा है, इसलिए राजनीति में निर्णायक साबित होता है। इनमें हिंदू हैं, तो मुसलमान और ईसाई भी। हिंदुओं में ओबीसी देवर समुदाय की अच्छी संख्या है। इस लोकसभा क्षेत्र में क्रमश: 17 फीसदी और 5 फीसदी संख्याबल रखने वाले मुसलमान और ईसाई द्रमुक-कांग्रेस समर्थित इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के उम्मीदवार मौजूदा सांसद कनि के. नवास का समर्थन कर रहे हैं। उधर, हिंदुओं का वोट द्रमुक, अन्नाद्रमुक और अन्नाद्रमुक से छिटक कर भाजपा के समर्थन से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पूर्व सीएम ओ पनीरसेल्वम यानी ओपीएस के बीच बंटेगा। पर, यहां 75 फीसदी से अधिक हिंदू हैं, इसलिए वोटों की बंदरबांट में सबको कुछ न कुछ मिलेगा। जिसे जितना ज्यादा मिलेगा, वह उतना आगे जाएगा।
भाजपा ने मसला हल करने का भरोसा देकर गरमाई तटीय क्षेत्रों की राजनीति
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई मछुआरा समुदाय की ताकत को समझते हैं। इसीलिए इनसे भावनात्मक जुड़ाव वाले कच्चातिवु द्वीप मसले पर द्रविड़ पार्टियों जैसा स्टैंड लेकर संकेत दिया कि केंद्र सरकार ही मसला सुलझा सकती है। बताते चलें, श्रीलंका के नेदुन्तीवु और रामेश्वरम के बीच स्थित कच्चातिवु छोटा सा द्वीप है, जो 14वीं सदी में ज्वालामुखी विस्फोट के कारण बना था। यह मूलत: रामेश्वरम के राजा की संपत्ति का हिस्सा था। केंद्र की कांग्रेस सरकार ने 1974 से 76 के बीच हुए समुद्री सीमा निर्धारण समझौतों के तहत 285 एकड़ भूमि वाले इस हिस्से को श्रीलंका को सौंप दिया था। तमिलनाडु की सरकारें तबसे इसे वापस लेने की मांग कर रही हैं। श्रीलंका सेना यहां भारतीय मछुआरों को पकड़कर जेल में डाल देती है, जिन्हें सरकारी हस्तक्षेप से छुड़वाया जाता है। कई बार उनके गार्ड्स की गोलीबारी में मछुआरे घायल भी हुए हैं। अन्नामलाई ने आरटीआई के जरिये इस मुद्दे को फिर गर्मा दिया। यह पहली बार है जब तमिल हक से जुड़े मामले का भाजपा ने इस तरह समर्थन दिया है।
हालांकि, पंबन इलाके के कई बड़े मछुआरे इसे चुनावी स्टंट मान रहे हैं। मछली कारोबारी विक्टर और इलैयाराजा कहते हैं कि यह अंतरराष्ट्रीय मसला है, केंद्र सरकार द्वीप वापस कैसे ले सकती है। सिर्फ हवाबाजी चल रही है। लेकिन, वहीं बैठे मुरलीधरन ने कहा कि अब तक राज्य सरकारें पहल करती थीं, अब केंद्र कर रहा है। ऑटो संघ से जुड़े व देवर समुदाय के कलि राज कहते हैं कि ओपीएस हमारे बड़े नेता हैं। हम तो उनके चेहरे पर वोट डालेंगे।
यहां की छह में चार विधानसभा सीटों पर द्रमुक और दो पर कांग्रेस का कब्जा है। दोनो मुस्लिम लीग का समर्थन कर रहे हैं, इसलिए भाजपा की राह कठिन है। देखना है कि ओपीएस को हिंदू किस हद तक यस (हां) कहते हैं।
पिछले दो चुनावों के हाल
2019
उम्मीदवार दल मत%में
अनवर राजा अन्नाद्रमुक 40.54
मो. जलील एस डीएमके 28.63
2014
अनवर राजा अन्नाद्रमुक 40.54
मो. जलील एस डीएमके 28.63
कनि के नवास आईयूएमएल 44.05
एन नागेंद्रन भाजपा 32.13
चारों ओर पानी, लेकिन सूखे से परेशान
कच्चातिवु और ओपीएस फैक्टर के अलावा भी यहां कई मुद्दे हैं। चारों ओर पानी के बावजूद क्षेत्र सूखे से परेशान है। यहां की रेतीली जमीन में सामान्य कृषि कार्य मुश्किल है। पीने के पानी का संकट रहता है। यहां चोलम, कंबु और रागी की खेती होती है। कपास भी उगाया जाता है। दक्षिण तमिलनाडु के आर्थिक विकास के उत्प्रेरक बंदरगाह तूतीकोरिन के रास्ते में खजूर और नारियल के पेड़ बहुतायत में मिलेंगे, जिनसे कई उत्पाद बनते हैं। हालांकि, मछली पालन के बढ़ते रुझान ने कृषि को समेटा और समुद्र को दूषित किया है।
कन्याकुमारी: शक्ति उपासना का केंद्र, हाथ में कमल खिलाने की कोशिश
कन्याकुमारी यानी देश का दक्षिणी छोर। शक्ति उपासना का केंद्र। हिंद महासागर (दक्षिण में), बंगाल की खाड़ी (पूर्व) और अरब सागर (पश्चिम) की त्रिवेणी। लेकिन, राजनीति के सागर में यहां दो ही दल मुकाबले में हैं। भाजपा और कांग्रेस। तीसरा दल द्रमुक कांग्रेस का समर्थन कर रहा है। इस लोकसभा क्षेत्र के तहत छह विधानसभाएं आती हैं। इनमें दो में कांग्रेस विधायक हैं। भाजपा, द्रमुक और अन्नाद्रमुक एक-एक सीट पर काबिज हैं।
कन्याकुमारी के महत्व व कच्चातिवु जैसे मुद्दों के चलते देखने में यह राष्ट्रीय चुनाव सा प्रतीत होता है, पर भावनाओं के मध्य में खालिस तमिलनाडु है। जिस तरह यहां उगते और डूबते सूर्य को देखने देशभर से लोग उमड़ते हैं, वैसे ही इस बार इस मुकाबले को लेकर यहां आ रहे लोगों में जिज्ञासा है। महाराष्ट्र से आए 40 लोगों के जत्थे ने विवेकानंद रॉक जाते समय नाव में जय श्रीराम का नारा लगाया और पूछने पर बताया कि सब सतारा से आए हैं। साथ ही बोले-टूर ऑपरेटर बता रहा था कि यहां भाजपा जीत रही है।
इसी तरह, बोट क्लब से बाहर निकलते ही अमरूद का ठेला लगाने वाले महेंद्रन ने हाथों से इशारा किया-भाजपा अप (ऊपर), कांग्रेस डाउन (नीचे)। थम्स-अप का इशारा करते हुए बोले-मोडी। स्पष्ट है-भावनाएं भाषा की मोहताज नहीं।
अब थोड़ा राजनीति शास्त्र पढ़ लेते हैं। कन्याकुमारी को 2009 में लोकसभा सीट का दर्जा मिला। द्रविड़ पार्टियों का जोर था। लिहाजा द्रमुक जीत गई। भाजपा के पोन राधाकृष्णन 60 हजार वोटों से पिछड़ गए और दूसरे स्थान पर रहे। 2014 में उन्होंने वापसी करते हुए जीत हासिल की। इस बार कांग्रेस की ओर से वसंत कुमार के पिता एच वसंत कुमार दूसरे स्थान पर रहे। लेकिन, 2019 में वे भारी मतों से जीत गए। फिर कोविड में उनकी मौत हो गई और 2021 के उपचुनाव में भावनात्मक लहर में विजय वसंत की जीत हुई। इस बार विजय और भाजपा के पोन राधाकृष्णन आमने-सामने हैं। हाल ही में राधाकृष्णन ने केंद्र से कहकर श्रीलंका के कब्जे से मछुआरों को छुड़वाया था। कन्याकुमारी के आसपास मछुआरों की बस्तियों में इसी बात की चर्चा है। वे मान रहे हैं कि ऐसा बहुत दिनों बाद हुआ।
केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद से श्रीलंका आमतौर पर कार्रवाई से बच रहा है। यहां 49 फीसदी हिंदू हैं और 47 फीसदी ईसाई। मुसलमान यहां 4 फीसदी से थोड़ा ही ज्यादा हैं। इसलिए सियासी टक्कर कांटे की होती है। यहां पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम दिग्गज कांग्रेस को आड़े हाथों ले चुके हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी की भारत-जोड़ो यात्रा को यहां आए समय हो गया, लेकिन लोग अब भी इसका जिक्र करते हैं।
पर्यटकों की बड़ी संख्या बढ़ा रही नागरिक समस्या
पर्यटकों के बढ़ते दबाव के चलते उपजी नागरिक समस्याएं और समुद्र में जा रहा कचरा यहां बड़े मुद्दे बने हुए हैं। इसके अलावा कन्याकुमारी में अक्सर तूफान आते हैं। आपदा प्रबंधन भी यहां मुद्दा है। होटल में मैनेजर के रूप में कार्य कर रहे वरिष्ठ नागरिक राधाकृष्णन कहते हैं कि इस जगह को विश्वस्तरीय बनाना है तो भाजपा ही विकल्प है। केंद्र मदद करेगा तो ऐसा संभव है।
शक्ति की उपासना का प्रसंग
कहा जाता है कि राजा भरत की पुत्री शक्ति अवतार कुमारी ने यहां कन्या रूप में शिव के वरण के लिए तपस्या की थी। यहां इस पौराणिक कथा को बताता कन्याकुमारी अम्मन मंदिर है, जहां मां के दर्शन के लिए हर रोज सैकड़ों लोग जुटते हैं।
पिछले दो चुनावों के हाल
2019
उम्मीदवार दल मत%में
एच वसंथकुमार कांग्रेस 59.77
पोन राधाकृष्णन भाजपा 35
2014
पोन राधाकृष्णन भाजपा 37.62
एच वसंत कुमार कांग्रेस 24.64