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Ground Report: किसी मां का मंगलसूत्र बिका तो किसी के खेत गिरवी, झारखंड छात्र आंदोलन की दर्दनाक तस्वीर

सार

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे हजारों प्रतियोगी छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और न्याय की मांग उठाई। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने बताया कि उन्होंने वर्षों तक कठिन तैयारी की, परिवार ने कर्ज लिया और कई लोगों ने आर्थिक संकट झेलकर पढ़ाई कराई, लेकिन विवादों और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया।
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झारखंड में छात्रों का आंदोलन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
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झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्रों की भीड़ के बीच सबसे ज्यादा सुनाई देने वाली आवाज किसी नेता की नहीं, बल्कि उन युवाओं की है, जिन्होंने अपनी पूरी जवानी सरकारी नौकरी के सपने में लगा दी है।
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कोई 12 साल से तैयारी कर रहा है। किसी की मां ने बेटे की कोचिंग और किताबों के लिए अपना मंगलसूत्र बेच दिया। कोई उम्र सीमा खत्म होने के डर से हर दिन टूट रहा है। इन छात्रों की आंखों में अब सिर्फ नौकरी का सपना नहीं, बल्कि न्याय की मांग है। उनका कहना है कि अगर भर्ती परीक्षाएं ही निष्पक्ष नहीं होंगी, तो मेहनत करने का क्या मतलब रह जाएगा।

घर में इलाज तक के पैसे नहीं
आरती पांडेय बताती हैं कि उनके पिता एक गैस एजेंसी में काम करते हैं। परिवार की हालत ये है कि अगर घर में कोई बीमार पड़ जाए तो उसके इलाज के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है। चयन लेडी सुपरवाइजर में हो गया था। लेकिन बाद में नियुक्ति रद्द हो गई। 
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कर्ज लेकर पढ़ाई की अब और क्या बेचें
आंदोलन में शामिल रवि महतो भावुक होकर कहते हैं, मेरी मां ने मेरी पढ़ाई के लिए अपना मंगलसूत्र बेच दिया। घर वालों ने खेत गिरवी रखा, कर्ज लिया, ताकि मैं पढ़ सकूं। लेकिन अगर नौकरियां पैसे वालों को ही मिलनी थीं तो हमें इतने साल पढ़ने के लिए क्यों कहा गया? उनकी आंखें भर आती हैं। वह कहते हैं, हम सरकार से नौकरी नहीं मांग रहे। हम सिर्फ निष्पक्ष परीक्षा और न्याय मांग रहे हैं।

नौकरी की उम्र निकलने का डर
बोकारो से आए प्रदीप बताते हैं कि वह पिछले 12 वर्षों से लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। वह कहते हैं, हर बार नई उम्मीद से तैयारी करते हैं और हर बार किसी न किसी विवाद की खबर आ जाती है। डर लगने लगा है कि उम्र सीमा ही खत्म न हो जाए।
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