पुष्टाहार योजना ने शिकारपुर, अनूपशहर, बुलंदशहर के कई गांवों की चौखट पर तोड़ा दम। बुलंदशहर पोषण पुनर्वास केंद्र के स्टाफ ने बताया कि यहां बेटा और बेटी में फर्क अब भी लोग करते हैं। नगर के धमेड़ा, टांडा, गिरधारीनगर, शांतिनगर, सरायधारी, मामनचौक आदि क्षेत्रों से अति कुपोषित बच्चे उपचार के लिए आए। टांडा, धमेड़ा में ऐसे मामले रहे कि यदि लड़का रहा तो परिजनों ने उसे भर्ती किया और खानपान का खूब ध्यान रखा। बेटी है और उसे भर्ती कराने को कहा तो बहाना बनाकर ले गए।
10 महीने में 1.5 किलो गेहूं, दूध व घी का पता नहीं
शिकारपुर देहात के मजरा आंबेडकरनगर में दोपहर करीब एक बजे अमरवती के घर पहुंचे। टूटा हुआ मुख्य द्वार गरीबी के कारण बनवा नहीं पाईं, अंदर से मकान कच्चा है, गुनगुनी धूप में बच्चे खेलकूद में व्यस्त थे। चार वर्षीय अति कुपोषित बच्ची संजना भी नहा धोकर अन्य चार भाइयों के साथ खेल रही थी। मां का दायित्व निभाते हुए अमरवती सभी बच्चों को संभालने, खाना पकाने और घर के कामकाज निपटाने में लगी हुई थी।