पश्चिम बंगाल के कूचबिहार के मुख्य बाजार से गुजरें, तो दुकानों पर एक-दूसरे पर चढ़े-से लगे झंडे अहसास करा देते हैं कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस किस कदर आमने-सामने हैं। करीब दस दिन पहले आमने-सामने तो ममता और मोदी भी थे। उन्होंने कुछ घंटों के फासले पर रैली की, एक-दूसरे पर जमकर हमला बोला। दोनों दल बेहद आक्रामक हैं। यह उत्तेजना जब लोकतांत्रिक रूप में सामने आती है, तो मतदान 84 फीसदी करा देती है और रोष में बदलती है, तो अस्पताल पहुंचा देती है। विधानसभा चुनाव की हिंसा में चार लोग मारे गए थे। बीते साल पंचायत चुनाव में भी खूब मारधाड़ हुई। तुर्शी भाषणों में भी दिखती है। ताजा मिसाल-सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा प्रत्याशी को राक्षस, डाकू बता दिया।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद भी सीट कितनी प्रतिष्ठापूर्ण है, इसका अंदाज चार अप्रैल को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की रैलियों से होता है। यूं प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सिर्फ रैली का था, पर उनका काफिला रोड शो में बदल गया था। यूं तो कूचबिहार ट्रॉफी क्रिकेट टूर्नामेंट का बड़ा नाम है, पर मौजूदा चुनावी खेल में कई माहिर सियासी खिलाड़ी उतर चुके हैं।
जोंखा व बंगाली के साथ ही बिहारी बोलने वाले भी यहां मिल जाएंगे। जितने चाव से माछ-भात खाया और बखाना जाता है, वैसे ही राजनीति भी गहरे उतरी है। मुद्दों की बात करें, तो मतदाता स्थायी उद्योग व रोजगार की बात करते हैं। युवा उच्च शिक्षा पर बेबाक राय और माटी से अपनापा रखते हैं। कहते हैं, यहां काम मिले, तो क्यों दिल्ली, मुंबई व कोलकाता में धक्के खाएं। तीन तरफ बांग्लादेश से घिरे होने के कारण जिला संवेदनशील भी है। इसके एक तरफ असम है, तो उत्तर में भूटान। कुछ सीमा बिहार को भी छूती है। मुख्य खेती धान है और थोड़ी-बहुत जूट आधारित इंडस्ट्री। पूरी दुनिया यहां के मंदिर देखने आती है। पहाड़ी लोग वैसे तो शांत स्वभाव के हैं, लेकिन चुनाव में मिजाज बदल जाता है। तनातनी दिखने लगती है।
मैदान में हैं केंद्रीय मंत्री निशिथ प्रमाणिक
भाजपा प्रत्याशी 35 साल के निशिथ प्रमाणिक मोदी सरकार के सबसे युवा मंत्री हैं। पंचायत चुनाव में गड़बड़ करने पर ममता ने निकाल दिया, तो वे भाजपा में चले गए। बीते चुनाव में तृणमूल के परेश चंद्र अधिकारी को करीब 50 हजार वोटों से हराया था। इसकी 7 में पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा काबिज है। तृणमूल ने यहां से जेसी बर्मा बसुनिया को उतारा है। बसुनिया राजबोंग्शी (राजबंशी) हैं। अनुसूचित जाति की सर्वाधिक आबादी वाले राजबोंग्शी ही निर्णायक हैं।
अलग राज्य की मांग...एक तीर से कई निशाने
असम के 15 जिलों, उत्तरी बंगाल के 6 जिलों यानी 21 जिलों को मिलाकर ग्रेटर कूचबिहार या कामतापुर राज्य बनाने की मांग अरसे से रही है। कई आंदोलन हो चुके हैं। दरअसल कूचबिहार के महाराजा जगद्वीपेंद्र नारायण और भारत सरकार के बीच हुई संधि के तहत 28 अगस्त 1949 को रियासत का विलय भारत में हुआ था। पर, अलग राज्य के लिए संघर्ष करने वाली ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन इसे अवैध बताती है। आरोप है, विलय संधि के अनुसार कूचबिहार को 12 सितंबर, 1949 को सी कैटेगरी के राज्य के रूप में अधिसूचित किया था, पर 1950 में इसे जिला बना दिया।
ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन के प्रमुख अनंत राय महाराज को भाजपा पिछले साल राज्यसभा में भेज चुकी है। अनंत राजबोंग्शी हैं। सियासी समीकरणों की बिसात पर बेहद अहम है। 2011 की जनगणना के अनुसार इनकी आबादी करीब 33 लाख है। अनंत के बहाने भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे। राजबोंगशी समुदाय उत्तर बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग और मालदा सीटों पर खासी तादाद में है।
वोटर बोले
चाय बागान में 15 साल से काम कर रही कालिका कहती हैं, कोई चुनाव आता है, हमें बेहतर मजदूरी, इलाज, पीएफ-पेंशन का यकीन दिलाया जाता है। पर, चुनाव बाद सब भूल जाते हैं, हमारा हाल नहीं बदलता।
कूचबिहार : पिछले दो चुनावों के हाल
2019
उम्मीदवार दल मत%
निशिथ प्रमाणिक भाजपा 47.98
परेश चंद्र अधिकारी तृणमूल 44.43
गोबिंद चंद्र रॉय फॉरवर्ड ब्लॉक 3.07
2014
रेणुका सिन्हा तृणमूल कांग्रेस 39.51
दीपक कुमार रॉय फॉरवर्ड ब्लॉक 32.98
हेमचंद्र बर्मन भाजपा 16.34
जातीय गुणा गणित
हिंदू 70-75%, मुस्लिम 20-25%, एससी 48.59% (करीब 30 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति राजबोंग्शी समुदाय की।)
भाजपा-तृणमूल में लड़ाई
2019 में भाजपा ने यहां खाता खोला। मतदान में 31 फीसदी की वृद्धि ने सभी को चौंका दिया। 1952 से 57 तक सीट कांग्रेस के पाले में रही। 1962 में फॉरवर्ड ब्लॉक ने कब्जा जमाया। 1977 से रोमांचक दौर शुरू हुआ। फॉरवर्ड ब्लॉक के अमर राय प्रधान पहली बार जीते और लगातार 1999 तक जीतते रहे। 2004 व 09 में भी सीट फॉरवर्ड ब्लॉक के पास रही। 2014 में मतदाताओं का मन व मूड बदला और फिर तृणमूल को जिताया। 2019 में यहां के मतदाताओं ने भाजपा को मौका दिया। इस बार भी लड़ाई भाजपा और टीएमसी के बीच सिमट गई है।