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Ground Report: खोई प्रतिष्ठा हासिल करने की जंग, बिहार के कटिहार में कांग्रेस-JDU की टक्कर; 26 अप्रैल को मतदान

Sun, 21 Apr 2024 05:23 AM IST
निर्मल कांत भूपेंद्र कुमार, अमर उजाला

सार

तारिक अनवर यहां से पांच बार सांसद रहे। वे 2014 की मोदी लहर में भी जीते, पर 2019 में जनता दल यू के दुलाल चंद्र गोस्वामी से हार गए। 1976 से राजनीति कर रहे तारिक अनवर के सामने खोई प्रतिष्ठा हासिल करने की बड़ी चुनौती है। यहां दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान है।
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जदयू प्रत्याशी दुलाल चंद्र गोस्वामी और कांग्रेस नेता तारिक अनवर - फोटो : चुनाव आयोग हलफनामा और एएनआई
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विस्तार
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अजब सी समानता है कटिहार और कांग्रेस के दिग्गज नेता तारिक अनवर में। छह नदियों से घिरा कटिहार कभी पटसन यानी जूट उद्योग के लिए विख्यात था। यहां दो बड़ी जूट मिल, दो फ्लोर मिल, एक माचिस फैक्टरी तथा कई तरह के उद्योग थे, पर सरकारी उदासीनता से धीरे-धीरे उद्योगविहीन हो गई। कटिहार की पहचान अब विस्थापन और पलायन है।
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तारिक अनवर यहां से पांच बार सांसद रहे। वे 2014 की मोदी लहर में भी जीते, पर 2019 में जनता दल यू के दुलाल चंद्र गोस्वामी से हार गए। 1976 से राजनीति कर रहे तारिक अनवर के सामने खोई प्रतिष्ठा हासिल करने की बड़ी चुनौती है। यहां दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान है। कटिहार सीट हमेशा ही कांटे की टक्कर के लिए विख्यात रही है, पिछले यानी 2019 के मुकाबले में दुलाल चंद्र गोस्वामी ने तारिक अनवर पर महज 40 हजार मतों से जीत दर्ज की थी।

कटिहार में प्रवेश से पहले लहलहाते खेत और मखाने के पोखर स्वागत करते नजर आते हैं। शहर में किराना स्टोर चलाने वाले सुमन कहते हैं, भाजपा यहां मजबूत है, पर उसके प्रत्याशी को टिकट ही नहीं मिला। यहां से मेयर ऊषा देवी के पति अशोक अग्रवाल को भाजपा टिकट देती तो वे पक्का जीतते। मिरचाईबाड़ी में बाइक शोरूम में मैनेजर वरुण कुमार कहते हैं, भाजपा के समर्थक दुलाल चंद्र को इसबार नहीं जिताने वाले। वहीं, दवा की दुकान पर मौजूद लक्ष्मीधर महतो कहते हैं, आखिर तक आते-आते धर्म के आधार पर वोट बंट जाते हैं। इस बार मुकाबला बराबरी का है।
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क्या कहते हैं प्रत्याशी
अपने संसदीय क्षेत्र में 42 बड़े पुल-पुलिया का निर्माण कराया है। 40 सड़कों की निविदा निकली है। इन्हें शीघ्र बनाया जाएगा। महानंदा में हर साल आने वाली बाढ़ से अब लोगों को कम परेशानी होगी।              
-दुलाल चंद्र गोस्वामी, जनता दल (यू) के प्रत्याशी

अबकी बार 400 पार का जुमला दस साल से सुन रहा हूं, इस बार जनता केंद्र में परिवर्तन चाहती है। कटिहार उद्योग नगरी के तौर पर जाना जाता था, अब यहां से पलायन हो रहा है, मौका मिला तो हालात बेहतर करेंगे।
-तारिक अनवर, कांग्रेस प्रत्याशी

कटिहार: दो चुनावों का हाल
2019
उम्मीदवार         दल        मत           मत%
दुलालचंद्र        भाजपा   5.6 लाख     50.02
तारिक अनवर   कांग्रेस   5.0 लाख     44.91

2014
उम्मीदवार        दल          मत            मत%
तारिक अनवर  कांग्रेस     4.3 लाख      44.1
निखिल चौधरी  भाजपा     3.2 लाख      32.4

निखिल चौधरी और तारिक अनवर के इर्द-गिर्द राजनीति
कटिहार की राजनीति पिछले चार दशक से निखिल चौधरी व तारिक अनवर के इर्द-गिर्द घूमती रही है। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर तारिक अनवर ने पहली बार यहां से जीत दर्ज की थी। 11 बार किसी न किसी प्रत्याशी का तारिक से मुकाबला हुआ है, वहीं, निखिल तीन बार इस सीट पर जीते हैं। तारिक चार बार कांग्रेस और एक बार एनसीपी से जीते हैं। 1999 में कांग्रेस छोड़कर शरद पवार के साथ उन्होंने एनसीपी बनाई थी। 2018 में वे वापस कांग्रेस में आ गए थे।

टेंपो भी चलाया गोस्वामी ने 
वहीं, 2019 में सांसद बनने वाले गोस्वामी किसान के बेटे हैं। 21 साल में वे बारसोई प्रखंड अध्यक्ष बने। आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए टेंपो भी चलाया।

जातीय समीकरण  
कटिहार में मुस्लिमों के अलावा यादव और सवर्ण वोटरों का दबदबा रहा है। 41 फीसदी मुस्लिम, 11 फीसदी यादव और आठ फीसदी उच्च जाति, 16 फीसदी वैश्य, 18 फीसदी ओबीसी हैं। छह फीसदी दलित वोटर हैं। मुस्लिम और यादव वोट मिलाकर 52 फीसदी हैं। यानी एम-वाई समीकरण जिसका बैठा यह सीट उसी की।
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