भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों को हिदायत दी है कि 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद से 30 दिसंबर तक करेंसी चेस्ट की फुटेज सहेज कर रखें। इस बाबत अमर उजाला ने कई शहरों में हालात का जमीनी जायजा लिया।
जायजे के दौरान ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों की हकीकत सामने आई। यहां कई बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगे ही नहीं हैं। कुछ बैंकों ने तो इसी महीने कैमरे लगाए हैं। ऐसे में नवंबर की फुटेज इन बैंकों से मिलना संभव नहीं है।
आरबीआई के आदेश के बाद सक्रिय हुई कानपुर पुलिस
वैसे तो हर महीने बैंक अधिकारी सीसीटीवी फुटेज और अलार्म के काम करने का प्रमाणपत्र पुलिस को देते हैं, लेकिन नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों से सीसीटीवी सुरक्षित रखने के निर्देशों के बीच कानपुर पुलिस भी सक्रिय हो गई है।
एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि कानपुर में 770 बैंकों की शाखाओं में सीसीटीवी कैमरों और अलार्म सिस्टम की जांच पुलिस नियमित करती है और इसकी रिपोर्ट संबंधित थाना और बैंक अधिकारी देते हैं। इसकी एंट्री भी थाने के रजिस्टर में नियमित होती है।
ऐसी स्थिति में बैंक चाह कर भी गोलमाल नहीं कर सकते। जिस बैंक के सीसीटीवी कैमरे ठीक होने की पुलिस रिपोर्ट लगी होगी उन बैंकों के अधिकारी सीसीटीवी कैमरा खराब होने का बहाना नहीं कर पाएंगे।
लखनऊ के ग्रामीण बैंकों में शोपीस बने सीसीटीवी
लखनऊ जिले में बैंकों की करीब 850 शाखाएं हैं। यहां अधिकतर ग्रामीण शाखाओं में सीसीसीवी शोपीस बने हुए हैं। यहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और उन्हें 24 घंटे चलाने के लिए पॉवर बैकअप तक की व्यवस्था नहीं है। मोहनलालगंज के एचडीएफसी बैंक में सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग और स्क्रीन पर विज्युल देखने तक की व्यवस्था नहीं मिली।
मोहनलालगंज के बैंक ऑफ इंडिया में आठ कैमरे लगे हैं जिन्में 4 तो खराब हैं। अलबत्ता शहर के तेलीबाग और राजाजीपुरम इलाके में बैंकों के सीसीटीवी काम करते मिले। केनरा बैंक प्रबंधक का दावा है कि उनके यहां तीन महीने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा रही है।